24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बुजुर्ग तीर्थ यात्रियों की जान से खिलवाड़? पंजाब की AC स्लीपर बसों पर NHRC सख्त, सुरक्षा खामियों पर मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत चलाई जा रही AC स्लीपर बसों में सुरक्षा संबंधी कमियों के आरोपों पर संज्ञान लिया है। NHRC ने पंजाब के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

चंडीगढ़ पंजाब

•

image

Anand Shekhar

•

Updated: 24 Oct 2026, 10:05 AM IST

NHRC Office

NHRC Office (File Photo)

NHRC Punjab Bus Safety: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर तीर्थयात्रियों के लिए इस्तेमाल की जा रही बिना अनुमति के मॉडिफाइड और असुरक्षित AC स्लीपर बसों के खिलाफ मिली शिकायतों पर संज्ञान लिया है। NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि इंसानी जान की सुरक्षा को महज एक औपचारिकता नहीं माना जा सकता और किसी भी सरकारी योजना में अनिवार्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

क्या आरोप लगाए गए हैं?

नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन द्वारा 22 अक्टूबर 2024 को दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद NHRC ने यह नोटिस जारी किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत चलाई जा रही AC स्लीपर बसों में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट (CIRT, पुणे) द्वारा तय की गई सुरक्षा गाइडलाइंस का उल्लंघन किया जा रहा है।

आरोप लगाया गया कि इन बसों में बिना अनुमति के स्ट्रक्चरल मॉडिफिकेशन किए गए हैं। ड्राइवर के केबिन और यात्रियों के बैठने की जगह के बीच दरवाजे और पार्टिशन लगा दिए गए हैं, जिससे यात्री पूरी तरह अलग-थलग हो गए हैं। इसके अलावा आपातकालीन खिड़कियों और बाहर निकलने के रास्तों को बंद कर दिया गया है। साथ ही आग का पता लगाने, आग बुझाने और आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए जरूरी उपकरणों की भारी कमी है।

NHRC ने जताई चिंता

मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यात्री और स्लीपर बसों में आग लगने की जानलेवा घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं और भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आयोग ने इस बात पर निराशा जताई है कि बार-बार चेतावनी देने और दिशा-निर्देश जारी करने के बावजूद ये कमियां अभी भी बनी हुई हैं।

आयोग ने इसे बेहद चिंताजनक और पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है कि पंजाब सरकार खुद अपनी कल्याणकारी योजनाओं के लिए ऐसे खतरनाक वाहनों का इस्तेमाल कर रही है। अगर इन बसों को नियमों का उल्लंघन करके चलाया जा रहा है, तो यह प्रशासनिक निगरानी और नियामक देखरेख में एक गंभीर विफलता को दर्शाता है।

बुजुर्गों के लिए जानलेवा हो सकता है मॉडिफिकेशन

आयोग ने कहा कि इस योजना के तहत यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों में से अधिकांश वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनकी चलने-फिरने की क्षमता सीमित है। आग लगने या किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति में वे वाहन से जल्दी बाहर नहीं निकल पाएंगे। यदि बस के अंदर कोई ऐसा पार्टीशन हो जो ड्राइवर और यात्रियों के बीच बातचीत में बाधा डाले और यदि आपातकालीन निकास बंद हों, तो आग लगने की स्थिति में ड्राइवर को समय रहते सतर्क करना या यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना असंभव हो जाएगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि कोई भी अप्रिय घटना बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए विनाशकारी और भयानक परिणाम ला सकती है।

विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई

मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को वरिष्ठ नागरिकों के मौलिक मानवाधिकारों और उनके जीवन के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन सचिव को नोटिस जारी किया है। उन्हें तुरंत जांच करने और की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है ताकि तीर्थ यात्राएं सुरक्षित रूप से और जानलेवा खतरों के बिना पूरी की जा सकें।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग