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Punjab Election 2027: पंजाब में दलित वोट कितना अहम, क्या कांग्रेस फिर दलित मुख्यमंत्री बनाएगी?

Punjab Congress Election Strategy: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस के सामने दलित वोट बैंक को वापस हासिल करने की चुनौती है। क्या चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम चेहरा बनाने से कांग्रेस को फायदा होगा या जट सिख मतदाताओं की नाराजगी भारी पड़ सकती है? जानिए पंजाब की सियासत का पूरा समीकरण।
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चंडीगढ़ पंजाब

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Ashib Khan

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Updated: 24 Oct 2026, 12:00 PM IST

Punjab Congress Election Strategy

क्या कांग्रेस एक बार फिर से चरणजीत सिंह चन्नी पर दांव खेलेगी? (Photo-IANS)

Punjab Election 2027: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राजनीतिक दलों द्वारा तैयारी तेज कर दी है। वहीं आगामी चुनावों को लेकर सभी पार्टियों की दलित वोट बैंक पर नजर है। दलित वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि 2022 चुनाव में कांग्रेस का यह दांव सफल नहीं हुआ और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

एक बार फिर से कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दलित को मुख्यमंत्री बनाकर वह अपना पुराना जनाधार वापस हासिल कर सकती है, या फिर ऐसा करने से जट सिख मतदाताओं के बीच उसकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हो सकती है? 

पंजाब में दलित वोटर कितना मायने रखता है?

पंजाब में 2011 की जनगणना के मुताबिक, प्रदेश की करीब 32 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की है। इसके साथ ही प्रदेश की 117 विधानसभा सीटों में से 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। वहीं 50 से 55 विधानसभा सीटों पर दलित हार-जीत की भूमिका में अहम रोल निभाते है। इसलिए सभी पार्टियों द्वारा दलित वोट बैंक को अपनी तरफ करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

क्या कांग्रेस एक बार फिर से चन्नी को बनाएगी सीएम? 

पंजाब में विधानसभा चुनाव 2022 से पहले कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। चन्नी प्रदेश के पहले दलित सीएम बने थे। चन्नी पर पार्टी ने दांव इसलिए खेला था, क्योंकि पंजाब के साथ यूपी में भी विधानसभा चुनाव थे। पार्टी ने अनुमान लगाया कि दलित सीएम का पंजाब के साथ-साथ यूपी में फायदा हो सकता है।

हालांकि पार्टी को पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। चन्नी भी खुद दो सीटों पर चुनाव लड़े थे और दोनों पर ही हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने महज 18 सीटों पर जीत दर्ज की। बताया जाता है कि कांग्रेस का यह अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन रहा है। 2022 के चुनाव में कांग्रेस को सत्ता-विरोधी माहौल, आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा था। 

हालांकि एक सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस दोबारा चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाएगी? हालांकि अभी तक कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी सीएम चेहरा घोषित नहीं किया है। 

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना पार्टी के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पार्टी फिलहाल उन्हें सीएम चेहरा घोषित करने से बच रही है।

दलित को सीएम प्रत्याशी घोषित करने से कांग्रेस के सामने चुनौती

रणनीतिसंभावित फायदासंभावित जोखिम
चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करनादलित मतदाताओं को स्पष्ट संदेशदूसरे दावेदारों में नाराजगी और सामाजिक संतुलन की चुनौती
चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़नाअलग-अलग समूहों को साथ रखने की गुंजाइशमुख्यमंत्री पद को लेकर अनिश्चितता
किसी दूसरे नेता को आगे करनाजट सिख या दूसरे वर्गों के बीच संतुलनदलित प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल

क्या दलित मुख्यमंत्री बनाने से जट सिख वोट कांग्रेस से खिसक सकता है?

पंजाब में जट सिख भी काफी अहम है। प्रदेश में करीब 21 प्रतिशत जट सिख आबादी है। हालांकि यह दलितों से कम है। प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर जट सिख जीत-हार में अहम भूमिका निभाते है। 

दरअसल, विधानसभा चुनाव 2022 में लोकनीति-CSDS के पोस्ट-पोल सर्वे के अनुसार, जट सिख मतदाताओं में कांग्रेस का समर्थन 2017 के 29% से घटकर 2022 में 16% रह गया था, जबकि आम आदमी पार्टी का समर्थन 46% तक पहुंच गया था। इससे पता चलता है कि कांग्रेस के लिए जट सिख समर्थन बनाए रखना पहले से ही चुनौती रहा है। 

ऐसे में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस चन्नी को सीएम प्रत्याशी घोषित कांग्रेस जट सिख वोट बैंक को दूर नहीं करना चाहती है। कांग्रेस ने जट सिख की जगह जट सिख को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। यही वजह है कि पार्टी सभी समुदाय को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है।