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‘संविधान से भी यह पुरानी है’, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए 100 साल पहले की मस्जिद हटाने पर भड़के ओवैसी

Krishi Bhawan Mosque: दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित 100 साल से ज्यादा पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने की केंद्र सरकार की मांग पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ये धर्मनिरपेक्षता के अनुकूल नहीं है।
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Updated: 4 Nov 2026, 5:30 PM IST
Asaduddin Owaisi
सांसद असदुद्दीन ओवैसी (फोटो-IANS)

Kadimi Masjid Delhi: नई दिल्ली के कृषि भवन में स्थित पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ रहा है। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले को लेकर एक बयान में कहा कि ये भारत के संविधान के धर्मनिरपेक्षता के सिंद्धात के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद इस देश की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत है। सरकार इस मस्जिद की मालिक नहीं है। जो इसे ऐसे ही हटा दे, यह एक पंजीकृत वक्फ है।

अंग्रेजों ने ही नहीं हटाया, अब ये सरकार हटा रही

ओवैसी ने कहा कि जिस मस्जिद को अंग्रेजों ने लुटियंस दिल्ली बसाते समय भी नहीं हटाया, उसे अब क्यों हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 1908 में लुटियंस दिल्ली का निर्माण शुरू किया गया था। इस दौरान कई गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया, लेकिन इस मस्जिद का अधिग्रहण नहीं किया गया था और इसे छोड़ दिया गया था।

उन्होंने कहा कि यह मस्जिद संविधान बनने और दिल्ली के राजधानी बनने से भी पहले से मौजूद है। सरकार इस मस्जिद की मालिक नहीं है, बल्कि यह वक्फ के रूप में पंजीकृत है। ओवैसी ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से भी इस मामले में ध्यान देने की बात कही।

'सरकार को मस्जिद से एलर्जी है'

इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को इस ऐतिहासिक मस्जिद से एलर्जी है। लेकिन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का उद्धाटन भूमि पूजन के साथ किया गया था। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए एक ही धर्म के अनुष्ठानों के इस्तेमाल से धर्मनिरपेक्षता को ठेस नहीं पहुंचती है, लेकिन उस मस्जिद से आपत्ति है जो कृषि भवन के बनने से बहुत पहले से वहां मौजूद है।

केंद्र ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?

वहीं, केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा देकर सेंट्रल विस्टा परियोजना के लिए मस्जिद हटाने की मांग की है। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि कृषि भवन परिसर में मौजूद मस्जिद सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं है। सरकार के मुताबिक, किसी केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर के भीतर स्थायी धार्मिक ढांचा बनाए रखना उचित नहीं है। इसलिए इसे हटाया जाना चाहिए।

सेंट्रल विस्टा परियोजना के लिए जरूरी बताया

केंद्र ने बताया कि मस्जिद की जगह पर सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) की बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास होना है। यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और मस्जिद की मौजूदगी से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। सरकार ने यह भी कहा कि कृषि भवन से दो किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्तागंज मौजूद है, जहां नमाज पढ़ने की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में कृषि भवन परिसर में अलग मस्जिद की जरूरत नहीं है।

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4 Nov 2026, 5:30 PM IST
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