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जोधपुर रेप केस: आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत से साफ इनकार

जोधपुर नाबालिग रेप केस में आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से फिलहाल इनकार कर दिया है। जानिए कोर्ट ने क्या कहा है।
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Jun 30, 2026
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आसाराम बापू (फाइल फोटो - आईएएनएस)

Asaram Bapu Bail Rejection: स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को जोधपुर नाबालिग दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने आसाराम की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करते हुए राजस्थान सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद होगा फैसला

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना आसाराम को जमानत नहीं दी जा सकती है। अदालत ने कहा कि अगर स्वास्थ्य इतना गंभीर हो कि जान का खतरा हो तभी अंतरिम राहत पर विचार किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस बीच आसाराम की तबीयत बिगड़ती है तो वह दोबारा जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।

मेडिकल आधार पर मांगी थी अंतरिम जमानत

90 साल के आसाराम ने अपनी ढलती उम्र और खराब सेहत का हवाला देकर कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने (अंतरिम जमानत) की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को भी चुनौती दी है,जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई थी।

सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि उनकी उम्र 90 वर्ष है और वह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि आसाराम का इलाज आयुर्वेदिक अस्पताल में भी कराया गया था।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2013 का है। आरोप है कि आसाराम के एक नाबालिग अनुयायी को जोधपुर के मनाई स्थित आश्रम में गलत तरीके से रोककर उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। पीड़िता को धमकाने के भी आरोप लगाए गए थे।

मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आसाराम के साथ सह-आरोपी संचिता शिल्पी और शरद चंद्र को भी दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ सभी ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था?

इसी साल मई 2026 में राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को बलात्कार और पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत दोषी मानने के फैसले को सही ठहराया था और उसकी सजा बरकरार रखी थी। हालांकि, अदालत ने यह भी माना था कि इस मामले में सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) और आपराधिक साजिश के पुख्ता सबूत नहीं हैं इसलिए आसाराम और उसके दोनों सहयोगियों को इन आरोपों से बरी कर दिया गया था।

इसी फैसले को चुनौती देते हुए आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। फिलहाल शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है और मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

Updated on:
30 Jun 2026 03:15 pm
Published on:
30 Jun 2026 02:45 pm