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जगन की हत्या के बाद 12 साल पुराना जेल कांड चर्चा में, जब आनंदपाल ने राइट-हैंड के कातिलों को पीट-पीटकर मार डाला था

Jagan Gurjar Death: अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। हालांकि, यह ऐसा पहला मामला नहीं है। राजस्थान में 12 साल पहले भी जेल के अंदर हत्याकांड का ऐसा ही मामला सामने आ चुका है।
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बीकानेर

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Anil Prajapat

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Updated: 30 Jun 2026, 2:45 PM IST

Jagan Gurjar Anandpal Singh (1)

जगन गुर्जर और आनंदपाल सिंह। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। अजमेर में घूघरा स्थित हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को हार्डकोर बंदी और कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। बैरक नम्बर 2 में साथी बंदी भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने गमछे से गला घोंटकर डकैत जगन गुर्जर की हत्या करना कबूल किया है। दोनों तीन माह से बैरक में साथ बंद थे। इस हत्याकांड के बाद हाई सिक्योरिटी जेल में सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। हालांकि, यह पहला मामला नहीं है जब जेल के अंदर किसी कुख्यात अपराधी की बंदी ने हत्या की हो। राजस्थान में 12 साल पहले भी ऐसा ही हत्याकांड का मामला सामने आ चुका है।

बीकानेर की सेंट्रल जेल में साल 2014 में राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर बलवीर बानूड़ा की हत्या गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के बाद गैंगस्टर आनंदपाल सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों हमलावरों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जेल के अंदर होने वाला यह राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा गैंगवार था। लेकिन, अजमेर की जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के बाद 12 साल पुराने गैंगवार की यादें फिर से ताजा हो गई है।

दरअसल, बीकानेर की सेंट्रल जेल में साल 2014 में 24 जुलाई की शाम गैंगवार हुई थी। जब कैदी बैरक के बाहर घूम रहे थे, तभी जयप्रकाश नाम के कैदी ने जेल के अंदर छिपाए गए अवैध कट्टे से आनंदपाल और बलवीर बानूड़ा पर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में सिर में गोली लगने से बलवीर बानूड़ा की मौके पर ही मौत हो गई थी। फायरिंग में आनंदपाल भी घायल हुआ था। राइट-हैंड माने जाने वाले बलवीर बानूड़ा की मौत से आनंदपाल आग बबूला हो गया था। इसके बाद आनंदपाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर हमलावर जयप्रकाश और रामपाल को जेल के भीतर ही पत्थरों और बर्तनों से पीट-पीटकर मार डाला था।

इसलिए की थी बलवीर बानूड़ा हत्या?

कभी दूध का धंधा करने वाले बलबीर बानूड़ा ने साल 1996 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद कुख्यात अपराधी राजू ठेहट से उसकी दोस्ती हो गई थी। फिर वह राजू ठेहट गैंग के लिए अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने लगा था। लेकिन, साल 2004 में राजू ठेहट ने अपने साथियों के साथ मिलकर बलबीर बानूड़ा के साले विजयपाल की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद राजू ठेहट और बलबीर बानूड़ा की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई।

अप्रैल 2006 में बलबीर बानूड़ा ने अपने साथियों के साथ मिलकर राजू ठेहट के करीबी गोपाल फोगावट की हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई थी। 26 जनवरी 2014 को सीकर जेल में राजू ठेहट पर हमला हुआ था। इस हमले के ठीक छह महीने बाद ही बीकानेर की जेल में बलवीर बानूड़ा पर राजू ठेहट गैंग फायरिंग की थी। उस वक्त आनंदपाल भी उसी जेल में था। बलबीर बानूड़ा को आंनदपाल का राइड हैंड माना जाता था। फायरिंग में बानूड़ा की मौत के बाद आनंदपाल और उसके साथियों ने जेल में ही हमलावरों की हत्या कर दी थी।