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नाले में उगे पेड़, 15-20 फीट ऊंचे पीपल के पेड़ों से खतरे में मकानों की नींव

क्षेत्र से गुजर रहे गंदे नाले में वर्षों से उगे दर्जनों पीपल के विशाल पेड़ अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। नाले की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं होने से बारिश के दौरान जलभराव, बिजली बाधित होने और मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका गहरा गई है।
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छोटा राणीसर बास में गंदे नाले में उगे पेड़ों को देखते क्षेत्रवासी

छोटा राणीसर बास में गंदे नाले में उगे पेड़ों को देखते क्षेत्रवासी

मानसून की पहली दस्तक ने जहां शहरवासियों को राहत का एहसास कराया है, वहीं गंगाशहर के छोटा राणीसर बास क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र से गुजर रहे गंदे नाले में वर्षों से उगे दर्जनों पीपल के विशाल पेड़ अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। नाले की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं होने से बारिश के दौरान जलभराव, बिजली बाधित होने और मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका गहरा गई है। स्थानीय दुकानदार जेठमल गहलोत ने बताया कि करीब तीन दशक पहले नाले के दोनों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया गया था, लेकिन उसके बाद नियमित सफाई और देखभाल नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ती गई। शीतला गेट, वाल्मीकि बस्ती, आचार्य घाटी और गोस्वामी मोहल्ले का गंदा पानी इसी नाले से होकर गुजरता है। नाले में उगे पीपल के पौधे अब 15 से 20 फीट ऊंचे पेड़ों का रूप ले चुके हैं।

मकानों की नींव तक पहुंचीं जड़ें
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पेड़ों की जड़ें भूमिगत पेयजल पाइप लाइनों तक पहुंच चुकी हैं, जिससे कई स्थानों पर लाइनें चोक हो रही हैं। वहीं जड़ें मकानों की नींव में भी प्रवेश कर रही हैं, जिससे भवनों की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है। पेड़ों की घनी शाखाएं ऊपर से गुजर रही बिजली लाइनों से उलझी हुई हैं। इसके कारण क्षेत्र में बार-बार लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है और तेज हवा या बारिश के दौरान घंटों बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। दूसरी ओर नाले में जमा कचरा और गंदगी से उठने वाली दुर्गंध तथा मच्छरों का प्रकोप लोगों के लिए अलग परेशानी बन गया है। बारिश के दौरान नाला ओवरफ्लो होने पर आसपास की गलियां जलमग्न हो जाती हैं और मुख्य मार्ग से संपर्क भी प्रभावित होता है।

धार्मिक आस्था का सम्मान रखते हुए स्थानांतरण की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पीपल के पेड़ों से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी होने के कारण उन्हें काटने की बजाय सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि इन पेड़ों को गंगाशहर-सुजानदेसर गोचर भूमि में शिफ्ट किया जाए। स्थानीय नागरिकों कृष्ण कुमार व्यास, मनोहर लाल गहलोत, सत्यनारायण भाटी, पवन कुमार आचार्य, जेठमल गहलोत, नत्थूराम गहलोत, राकेश, गोपी और मूलचंद सहित क्षेत्र के अनेक लोगों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आगामी बारिश में गंभीर हालात पैदा हो सकते हैं।