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‘ज्ञानेश कुमार से पहले भी 90 चुनाव हारे, अब देश से माफी मांगें राहुल गांधी’, चुनाव आयोग विवाद पर बोले हिमंत बिस्वा सरमा

SIR और चुनाव आयोग विवाद के बीच असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने 90 चुनाव हारने का जिक्र करते हुए कांग्रेस से माफी मांगने को कहा।
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Sep 27, 2026
Himanta Biswa Sarma and Rahul Gandhi
असम CM हिमंत बिस्वा सरमा और राहुल गांधी (फाइल फोटो - एएनआई)

Himanta Biswa Sarma on Rahul Gandhi: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और आरोप लगा रही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फैसले एकतरफा लिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने एक दिन पहले स्पष्ट कर दिया कि उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

सरमा ने सवाल किया कि जब पूरा चुनाव आयोग एक साथ सामने आकर फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है तो कांग्रेस ने लोगों के मन में भ्रम क्यों पैदा किया। उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि चुनाव आयोग पर हमला करने का उनका आधार क्या था।

संस्थाओं पर हमला कर रहे राहुल गांधी

असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी लगातार एक के बाद एक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की। सरमा ने कहा ज्ञानेश कुमार से पहले भी वह 90 चुनाव हार चुके हैं। उनके पास क्या वैधता है? उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का एकमात्र उद्देश्य भारत के लोकतंत्र को नष्ट करना है। सरमा ने कहा कि जब भी राहुल गांधी किसी चुनाव में हारते हैं चाहे वह बंगाल हो, असम हो या कोई दूसरी जगह, वह तुरंत इस तरह का ड्रामा शुरू कर देते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि लोग राहुल गांधी को देख रहे हैं और आने वाले समय में उन्हें लगातार सजा देंगे। ये सभी आरोप और टिप्पणियां हिमंत बिस्वा सरमा के बयान का हिस्सा हैं।

SIR को लेकर क्यों उठा विवाद?

दरअसल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा चुनावी डेटा से जुड़े मामलों को लेकर थीं। कुछ आपत्तियों में मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकृत नियंत्रण और फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा कि आयोग के सदस्यों की ओर से अलग-अलग राय, सवाल या सुझाव सामने आना आंतरिक विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर समेत उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

26 सितंबर को आयोग ने तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद भी यही रुख दोहराया। आयोग ने कहा कि देशभर में एसआईआर के लिए 24 जून 2025 को जारी आदेश को भी पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी।