APCC के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए। जानें उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर क्या तीखे आरोप लगाए।
असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। असम प्रदेश कांग्रेस समिति (APCC) के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने रविवार को औपचारिक रूप से भाजपा (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर राज्य की राजनीति में तहलका मचा दिया। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और राज्य मंत्री जयंत मल्ला बरुआ के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
भाजपा में शामिल होने के बाद भूपेन बोरा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल मूल्यों से भटक गई है और देश की आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। बोरा ने कहा, "मैंने कांग्रेस में 32 साल काम किया। जो कपड़े मैं आज पहन रहा हूँ, वे मेरे खून से सने हैं। यह खून राहुल गांधी की उपस्थिति में लगा।" उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय गौरव के मामलों में समझौता कर रही है। बोरा ने स्पष्ट किया, "मैंने कांग्रेस में 32 साल ईमानदारी और निष्ठा के साथ सेवा की। लेकिन कांग्रेस ने राष्ट्रीय आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाई। यह मैं स्वीकार नहीं कर सकता।"
भूपेन बोरा ने यह निर्णय किसी एक पल में नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यह गहन विचार-विमर्श और आत्मनिरीक्षण का परिणाम है। उनके अनुसार, अब कांग्रेस जनता की आकांक्षाओं और मूल्यों को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं करती।
भाजपा में शामिल होने के बाद दिलीप सैकिया ने बोरा का स्वागत करते हुए कहा कि उनका जुड़ना पार्टी संगठन को असम में और मजबूत करेगा। सैकिया ने कहा, "भूपेन बोरा के पास लंबा राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कौशल है। उनका भाजपा में शामिल होना हमारे प्रयासों को नई ऊर्जा देगा ताकि विकास और सुशासन हर वर्ग तक पहुंच सके।"
मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि बोरा का कदम भाजपा में बढ़ते भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अधिक नेता और कार्यकर्ता भाजपा में इसलिए शामिल हो रहे हैं क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के विकास-केंद्रित शासन में विश्वास करते हैं।
भूपेन बोरा का यह राजनीतिक कदम असम में अहम माना जा रहा है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत कर रही है, जबकि कांग्रेस आंतरिक झगड़ों और नेतृत्व संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है।