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ऑस्ट्रेलिया में ऊंटनी के दूध से बनाई देसी चाय, 18 साल पुरानी बीकानेर की यादें हुईं ताजा

राजस्थान की चाय और ऊंटनी के दूध का स्वाद एक ऑस्ट्रेलियाई शख्स को 18 साल बाद फिर बीकानेर की यादों में ले गया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले जोसेफ फ्रीमैन ने अपने घर पर ऊंटनी के दूध से देसी चाय बनाई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।
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Updated: 29 Oct 2026, 1:18 PM IST
Joseph Freeman
Joseph Freeman (Photo-Instagram/@joespeakshindi)

राजस्थान की चाय और ऊंटनी के दूध का स्वाद एक ऑस्ट्रेलियाई शख्स को 18 साल बाद फिर बीकानेर की यादों में ले गया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले जोसेफ फ्रीमैन ने अपने घर पर ऊंटनी के दूध से देसी चाय बनाई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि करीब 18 साल पहले बीकानेर में उन्होंने पहली बार ऊंटनी के दूध की चाय पी थी। अब ऑस्ट्रेलिया में अपने घर के पास एक दुकान पर ऊंटनी का दूध देखकर उन्हें काफी हैरानी हुई। इंस्टाग्राम पर @joespeakshindi नाम से वीडियो बनाने वाले जोसेफ ने एक वीडियो शेयर कर राजस्थान से जुड़े अपने इस अनूठे अनुभव को साझा किया है।

18 साल पहले बीकानेर में पी थी ऊंटनी के दूध की चाय

जोसेफ ने वीडियो में चाय बनाते हुए कहा कि उनके घर में आमतौर पर ऑस्ट्रेलिया में मिलने वाला दूध इस्तेमाल होता है, लेकिन इस बार उनकी चाय ऊंटनी के दूध से बनी है। उन्होंने बताया कि 18 साल पहले बीकानेर में उन्होंने ऊंटनी के दूध की चाय पी थी। आज जब मैंने अपने घर के पास वाली दुकान पर यह दूध देखा, तो मुझे बेहद हैरानी और खुशी हुई।

चाय बनाते समय जोसेफ ने कहा कि ढलता सूरज और चाय उन्हें राजस्थान की याद दिला रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक अलग तरह की चाय बनाने का अनुभव नहीं था, बल्कि करीब दो दशक पुरानी यादों को फिर से जीने का मौका भी था।

ऑस्ट्रेलिया में इतने ऊंट, फिर दूध आसानी से क्यों नहीं मिलता?

वीडियो में जोसेफ ने ऑस्ट्रेलिया में ऊंटों की बड़ी आबादी का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब देश में इतने ऊंट हैं, तो उनका दूध आसानी से क्यों नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि करीब 150 साल पहले अफगानिस्तान, भारत और दूसरे देशों से ऊंटों को काम और परिवहन के लिए ऑस्ट्रेलिया लाया गया था। बाद में इन ऊंटों की संतानों से वहां जंगली ऊंटों की बड़ी आबादी विकसित हुई।

19वीं सदी में ऑस्ट्रेलिया के शुष्क और दूरदराज के इलाकों में परिवहन तथा खोज अभियानों के लिए ऊंटों का इस्तेमाल किया जाता था। दक्षिण एशिया और अफगानिस्तान से आए ऊंट संचालकों ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज ऑस्ट्रेलिया में जंगली ऊंटों की बड़ी आबादी है, जबकि भारत में ऊंट मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों, खासकर राजस्थान, से जुड़े हैं। हालांकि, दोनों देशों में ऊंटों की संख्या का आकलन अलग-अलग तरीकों से किया जाता है और उपलब्ध आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं।

ऊंटनी के दूध का स्वाद कैसा होता है?

जोसेफ के वीडियो पर लोगों ने ऊंटनी के दूध के स्वाद को लेकर भी सवाल पूछे। एक यूजर ने पूछा कि ऊंटनी का दूध पीने में कैसा लगता है। इस पर जोसेफ ने जवाब दिया कि उन्हें इसका स्वाद बकरी के दूध के हल्के रूप जैसा लगा। यह बहुत मलाईदार नहीं होता, लेकिन इसका स्वाद गहरा होता है और इसका रंग काफी सफेद होता है।

एक अन्य यूजर ने बताया कि वह बीकानेर से है, लेकिन उसने कभी ऊंटनी का दूध नहीं चखा। इस पर जोसेफ ने बताया कि उन्होंने बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में ऊंटनी के दूध का स्वाद लिया था। उन्होंने ऊंटनी के दूध से बनी कुल्फी का भी जिक्र किया। बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ऊंटों और उनसे जुड़े उत्पादों, जिनमें दूध भी शामिल है, पर अनुसंधान करता है।

किसी को पसंद आई चाय, किसी ने बताया खराब स्वाद

वीडियो पर सभी लोगों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। एक यूजर ने ऊंटनी के दूध को खराब बताते हुए कहा कि इससे राजस्थानी चाय का स्वाद बिगड़ जाता है। हालांकि, जोसेफ ने इस टिप्पणी का हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया।

उन्होंने एक हिंदी मुहावरे का मजाकिया अंदाज में इस्तेमाल करते हुए कहा कि लगता है, उस व्यक्ति का ऊंट और उनका ऊंट अलग-अलग करवट बैठते हैं। उनके जवाब ने बातचीत को रोचक बना दिया।

Updated on:
29 Oct 2026, 1:18 PM IST
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