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दिल्ली के बाद अब हैदराबाद में ‘शीश महल’ पर बवाल! मंत्री बनते ही अजहरुद्दीन ने सरकारी बंगले पर उड़ाए 76 लाख

मंत्री क्वार्टर नंबर 29, जो हैदराबाद के प्रतिष्ठित बंजारा हिल्स इलाके में स्थित है, पिछले करीब 15 साल से खाली पड़ा था। लंबे समय तक बंद रहने से बंगला काफी जर्जर हो चुका है। रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग के आदेश के अनुसार, 76 लाख रुपये की मंजूरी कैपिटल आउटले के तहत दी गई है।
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Jan 29, 2026
Azharuddin
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन

Azharuddin Bunglow Controversy: तेलंगाना में कांग्रेस सरकार पर नए विवाद का बादल छा गया है। पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और हाल ही में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने मोहम्मद अजहरुद्दीन के सरकारी आवास की मरम्मत के लिए 76 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सरकार खुद को वित्तीय तंगी का हवाला देकर कल्याण योजनाओं, कर्मचारी बिलों और विकास परियोजनाओं के लिए फंड की कमी बता रही है। विपक्ष और जनता ने इसे 'शीश महल' जैसा लग्जरी खर्च करार दिया है।

बंगले की स्थिति और मरम्मत का विवरण

मंत्री क्वार्टर नंबर 29, जो हैदराबाद के प्रतिष्ठित बंजारा हिल्स इलाके में स्थित है, पिछले करीब 15 साल से खाली पड़ा था। लंबे समय तक बंद रहने से बंगला काफी जर्जर हो चुका है। रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग के आदेश के अनुसार, 76 लाख रुपये की मंजूरी कैपिटल आउटले के तहत दी गई है। काम में शामिल हैं:

  • छत की वाटरप्रूफिंग
  • फ्लोर टाइलिंग
  • UPVC विंडोज लगाना
  • मॉड्यूलर किचन
  • दीवारों की मरम्मत और पेंटिंग
  • अन्य आवश्यक रिपेयर

सरकार का दावा है कि ये बेसिक रिपेयर हैं, ताकि बंगला रहने लायक हो सके, न कि कोई लग्जरी रेनोवेशन। पिछले दो हफ्तों में ही दो मंत्रियों के आवासों के लिए 1 करोड़ से ज्यादा खर्च मंजूर हुए हैं, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री के बंगले के लिए 30 लाख शामिल हैं।

अजहरुद्दीन का राजनीतिक सफर और विवाद

मोहम्मद अजहरुद्दीन, जो भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रहे हैं, हाल ही में कांग्रेस में शामिल होकर तेलंगाना कैबिनेट में मंत्री बने। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग संभाल रहे हैं। लेकिन जल्द ही विवादों में घिर गए। पहले हैदराबाद में 'शीश महल' जैसी खबरें आईं, और अब दिल्ली के बाद उनके बंगले पर खर्च की आलोचना हो रही है।

विपक्ष और जनता की नाराजगी

विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। कहा जा रहा है कि जब कल्याण योजनाओं, पेंडिंग बिलों और विकास कार्यों के लिए फंड नहीं है, तो मंत्रियों के आवास पर करोड़ों क्यों खर्च किए जा रहे हैं? सोशल मीडिया पर लोग इसे 'प्राथमिकताओं का उलटा' बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "जनता की जेब से पैसा, मंत्री के महल पर?" सरकार का जवाब है कि 15 साल खाली पड़े बंगले को रहने योग्य बनाना जरूरी है, और यह कोई लग्जरी नहीं है।

Updated on:
29 Jan 2026 10:53 pm
Published on:
29 Jan 2026 10:52 pm