नोटबंदी के दौरान पुराने नोट जमा करने से इनकार करने के मामले में एक बैंक को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक के खिलाफ एक्शन लिया है।
भारत में नवंबर 2016 के दौरान हुई नोटबंदी में 500 और 1,000 रूपए के पुराने नोट बंद कर दिए गए थे और उनकी जगह 500 और 2,000 रूपए के नए नोट जारी किए गए थे। इस दौरान सरकार के आदेश पर बैंकों ने लोगों के पुराने नोट जमा भी किए थे, लेकिन एक बैंक ने ऐसा नहीं किया और अब इस मामले में उसे बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने नोटबंदी के दौरान पुराने नोट जमा करने से इनकार करने के मामले में एक्सिस बैंक को बड़ा झटका दिया है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्सिस बैंक को दिल्ली की लॉजिस्टिक्स कंपनी प्रोक्योर लॉजिस्टिक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 3.19 करोड़ रुपए के जुर्माने का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि बैंक ने सेवा में कमी बरती और कंपनी को उसके केवाईसी अनुपालन वाले खाते में पुराने नोट जमा करने की अनुमति नहीं दी।
आयोग के अनुसार 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद सरकार ने सीमित अवधि के लिए पुराने नोट बैंक खातों में जमा करने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद बैंक ने कई बार अनुरोध के बाद भी कंपनी के नोट जमा नहीं किए। आयोग ने कहा कि इससे कंपनी को आर्थिक नुकसान हुआ क्योंकि समय-सीमा समाप्त होने के बाद उसके पास मौजूद नोट बेकार हो गए।
आयोग के पीठासीन सदस्य एवीएम जे. राजेंद्र और न्यायिक सदस्य अनूप कुमार मेंदिरत्ता की पीठ ने 10 मार्च को यह आदेश दिया। आयोग ने कहा कि अगर बैंक को किसी लेन-देन पर संदेह था तो उसे संबंधित प्राधिकरण को सूचित किया जा सकता था, लेकिन केवाईसी अनुपालन वाले खाते में जमा लेने से इनकार करना उचित नहीं था। आयोग ने बैंक को 30 दिसंबर 2016 से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। दो माह में भुगतान न होने पर 9% वार्षिक ब्याज लागू होगा।