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जज बनने के लिए 3 साल वकालत ज़रूरी, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

जज बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले से चली आ रही एक अनिवार्यता के जारी रहने का आदेश दिया है। क्या है यह अनिवार्यता? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

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Updated: 14 Mar 2026, 7:30 AM IST

DNA test for adultery in divorce cases

सुप्रीम कोर्ट (Photo - ANI)

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीज़न) में नियुक्ति के लिए अनिवार्य 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह नियम लागू रहेंगे। अब सिर्फ यह तय करना है कि नियम लागू करने के तरीके क्या होने चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि जिन हाईकोर्टों ने पहले ही सिविल जज (जूनियर डिवीज़न) पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, वो आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रेल 2026 तक बढ़ाएं।

अगले सप्ताह होगी सुनवाई

इसके साथ ही भविष्य में जारी होने वाले नए विज्ञापनों में भी यही अंतिम तिथि निर्धारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। सुप्रीम कोर्ट के जजों की बेंच को बताया गया कि कुछ राज्यों में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि समीक्षा याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई की जाएगी और आवेदन की तारीख बढ़ाने से फिलहाल उम्मीदवारों की तात्कालिक समस्या दूर हो जाएगी।

फैसले का सम्मान करने की अपील

वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने प्रैक्टिस की अनिवार्यता को फिलहाल स्थगित करने की मांग की थी। इसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तय हुई है। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। प्रैक्टिस की शर्त का उद्देश्य अभ्यर्थियों को अदालतों के कामकाज का व्यावहारिक अनुभव करना है।

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