
पेशेवर चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज का खाता बांकीपुर उपचुनाव से खुल गया है। किशोर 19324 वोट से भाजपा को हरा कर चुनाव जीत गए हैं। बांकीपुर विधान सभा क्षेत्र बनने के बाद पहली बार वहां बीजेपी का विधायक नहीं होगा।
बीजेपी की यह हार चुनावी लिहाज से भले ही छोटी लगती हो, लेकिन इनके पीछे का संदेश बहुत बड़ा है। संदेश यही है कि किसी सीट को लेकर कोई पार्टी या नेता यह भ्रम पाल ले कि वह उसका गढ़ है तो जनता कभी भी वह भ्रम तोड़ सकती है। इस हार का राष्ट्रीय स्तर पर भी यही संदेश है कि आपका कोर वोटर भी बिना सोचे-समझे हमेशा आपके साथ नहीं रहेगा और समय आने पर झटका देने में पीछे नहीं हटेगा।
2025 में बांकीपुर में भाजपा के नितिन नवीन को 98299 वोट मिले थे। करीब सात महीने बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी के नीरज कुमार को मात्र 44827 वोट मिले। भाजपा को भ्रम था कि यह सीट उसके अलावा और कोई पार्टी नहीं जीत सकती। शायद इसी भ्रम के चलते पार्टी के बड़े नेता ने बयान दिया कि बांकीपुर में भाजपा से कुत्ता-बिल्ली भी खड़ा कर दिया जाए तो जीत जाएगा।
इस चुनाव में बीजेपी की हार के पीछे जंतर मंतर (नई दिल्ली) पर हुआ छात्रों का आंदोलन भी एक कारण बना। प्रशांत किशोर ने छात्रों के उठाए मुद्दों को मुद्दा बनाया और यह उनके पक्ष में गया। यह मुद्दा ऐसा था कि छात्रों को देश के हर वर्ग का समर्थन मिला और अंततः केंद्र सरकार को झुकना पड़ा। इस मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ पैदा हुई जन भावना को भुनाने में प्रशांत किशोर कामयाब रहे। अंततः उनकी जीत का संदेश यह भी है कि लगातार जन समर्थन अपने पक्ष में बनाए रखना लगभग असंभव है।
| नाम (Candidate Name) | पार्टी (Party Name) | कुल वोट (Votes) |
| प्रशांत किशोर | जन सुराज पार्टी | 64,151 |
| नीरज कुमार | भारतीय जनता पार्टी | 44,827 |
| रेखा कुमारी | राष्ट्रीय जनता दल | 14,273 |
| मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव | प्रगतिशील जनता पार्टी | 973 |
| तनवीर आलम | राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी | 864 |
| प्रदीप कुमार | भारतीय आम आवाम पार्टी | 781 |
| बैजनाथ प्रसाद | भारतीय जवान किसान पार्टी | 383 |
| अनिल दास | निर्दलीय (Independent) | 311 |
| सिकंदर कुमार | निर्दलीय (Independent) | 264 |
| जितेन्द्र दुबे | अखिल भारतीय जन संघ | 257 |
| रामबाबू प्रसाद | राष्ट्रीय गरीब दल | 240 |
| मृत्युंजय कुमार | राष्ट्रीय समाजहित दल | 233 |
| सूरज कुमार यादव | पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) | 231 |
| प्रेम शंकर प्रसाद | प्रौटिस्ट ब्लॉक, इंडिया | 225 |
| मनीषा शर्मा | राष्ट्रीय अपना दल | 207 |
बांकीपुर में बीजेपी का दबदबा कम होने के कई मायने हैं। यह सीट बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और उससे पहले उनके पिता की थी। नवीन की खाली की हुई सीट पर जन सुराज को बढ़त दे कर जनता ने संभवतः नितिन नवीन का यह भ्रम तोड़ने की कोशिश की है कि उन्हें जिताते रहे हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि वह किसी को भी थोप सकते हैं।
नितिन नवीन ने पहले अपने एक करीबी अभिषेक बंटी को बांकीपुर से उम्मीदवार बनाया था। बताया जाता है कि नवीन ने उनका नाम बिना किसी तय प्रक्रिया के तय कर लिया था। पार्टी के अंदर विरोध हुआ तो बंटी ने निजी कारणों से चुनाव से हटने का ऐलान किया। इसके बाद नीरज कुमार उम्मीदवार बनाए गए।
जन सुराज ने इसे भी एक मुद्दा बनाया और भुनाया। ऐसा नरेटिव बनाने की कोशिश की गई बीजेपी ने बांकीपुर को अपनी जेब की सीट समझ ली है। प्रशांत किशोर ने कहा कि भाजपा कहती है बांकीपुर में उसकी ओर से कुत्ता-बिल्ली को भी खड़ा किया जाए तो जीत होगी। मतलब बीजेपी बांकीपुर की पढ़ी-लिखी, समझदार जनता को कुत्ता-बिल्ली को चुनने लायक मानती है।
इसके अलावा जन सुराज ने यह नरेटिव भी बनाया कि प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी का असर यह है कि भाजपा को चुनाव से पहले ही उम्मीदवार बदलना पड़ा।
अभिषेक बंटी हों या नीरज कुमार, दोनों ही उम्मीदवार एकदम नए थे। विधान सभा चुनाव का टिकट मिलना इनके लिए पहला अनुभव था। नितिन नवीन ने संदेश दिया कि जैसे उन्हें जनता ने जिताया, वैसे उनके 'अपने उम्मीदवार' को जिताएं। प्रशांत किशोर ने संदेश दिया कि नितिन नवीन सांसद बनने के चक्कर में बांकीपुर की जनता को छोड़ कर चले गए और अगर नवीन को बांकीपुर के लोगों की फिक्र होती तो विधायक रहते हुए भी भाजपा अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी निभा सकते थे। बांकीपुर की जनता के लिए यह गर्व की बात होती कि उनका विधायक भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष है। किशोर का यह नरेटिव भी काम कर गया लगता है।
बांकीपुर में बीजेपी का नया और कमजोर उम्मीदवार होना पार्टी के लिए ठीक नहीं रहा। बीजेपी ने या तो अति आत्मविश्वास में, या फिर कड़े मुकाबले के आसार देखते हुए यह निर्णय लिया। ज्यादा संभावना है कि फैसला अति आत्मविश्वास में लिया गया। लोगों ने उम्मीदवार की तुलना की तो प्रशांत किशोर बेहतर और नया विकल्प लगे। उन्हें लगा जिस परिवार को उन्होंने हमेशा वोट दिया, जब उसका उम्मीदवार है ही नहीं तो नया (और अपेक्षाकृत मजबूत) विकल्प देखा जाए। वह कम से कम 'नाम वाला' तो है।
प्रशांत किशोर कई साल से बिहार में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इसके लिए उन्होंने लगभग पूरे राज्य का दौरा किया और 2025 के विधान सभा चुनाव में सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। लेकिन, सफलता नहीं मिली।
2025 के विधान सभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने रणनीति के साथ-साथ अपने तेवर भी बदले हैं। विधान सभा चुनाव के समय किशोर की बातों में तल्खी, अति आत्मविश्वास और कभी-कभी घमंड भी दिखता था। उपचुनाव के दौरान उनके बात-व्यवहार में घमंड का भाव कम देखने को मिला। इस चुनाव में उनके इस बदले बर्ताव ने भी निश्चित रूप से उनके लिए सकारात्मक काम किया।
बांकीपुर विधान सभा सीट 2008 में बनी है। पहले यह पटना पश्चिम विधान सभा क्षेत्र में आता था। 1995 से 20025 तक यहां बीजेपी के अलावा कोई पार्टी नहीं जीती। नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की मृत्यु की वजह से यहां 2006 में उपचुनाव हुआ तो पहले बार नितिन नवीन यहां से विधायक बने। उसके बाद वह भी लगातार जीतते ही रहे। भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें पार्टी ने राज्य सभा भेजा तब इस सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की नौबत आई।
| वर्ष (Year) | नाम (Name) | दल / पार्टी (Party) |
| 1957 | रामशरण साव | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1962 | कृष्ण बल्लभ सहाय | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1967 | महामाया प्रसाद सिन्हा | जन क्रांति दल |
| 1969 | ए. के. सेन | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया |
| 1972 | सुनील मुखर्जी | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया |
| 1977 | ठाकुर प्रसाद | जनता पार्टी |
| 1980 | रंजीत सिन्हा | इंडियन नेशनल कांग्रेस |
| 1985 | रामा नंद यादव | निर्दलीय (Independent) |
| 1990 | रामा नंद यादव | निर्दलीय (Independent) |
| 1995 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2000 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2006 से | नितिन नवीन | भारतीय जनता पार्टी |