
Fake Cancer Drugs: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में नकली और गलत लेबल वाली दवाओं की पहुंच को लेकर बेंगलुरु की जांच ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में नकली दवाओं की सप्लाई बेंगलुरु और आसपास के इलाकों के 90 से ज्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुंचने की बात सामने आई थी। इस मामले में कर्नाटक पुलिस की SIT ने फर्जी दवा रैकेट मामले के मुख्य आरोपी प्रशांत की लोकेशन दक्षिण काकेशस क्षेत्र के एक देश में ट्रेस की है और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। SIT ने अब तक 12 ठिकानों पर छापेमारी की है और पांच लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि मुख्य आरोपी वीरेश जैन से पूछताछ की गई है। नेटवर्क में कैंसर की दवाएं, ICU इंजेक्शन और मांग वाली फाइजर दवाओं के नकली वर्जन शामिल होने का दावा किया गया है।
SlT के मुताबिक, संदिग्ध नेटवर्क में दवाएं 50 प्रतिशत तक की छूट पर बेची जाती थीं। महंगी कैंसर दवाओं के बाजार में इतनी बड़ी छूट खरीदारों को आसानी से लुभाती थीं। जांच में 15 से अधिक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की भूमिका सामने आने का भी दावा किया गया है और सप्लाई महाराष्ट्र तथा गुजरात तक पहुंचने के संकेत मिले हैं।
मामला तब खुला जब मगाडी के तावरेकेरे इलाके में एक गुप्त स्टॉकहाउस पर छापेमारी की गई। अब जांच का सबसे अहम सवाल यह है कि इन दवाओं में से कितनी अस्पतालों में मरीजों को दी गईं। अस्पतालों ने दवाओं के बैच नंबर और निर्माता के रिकॉर्ड का मिलान किया था या नहीं, यह भी जांच का एक अहम हिस्सा है।
नकली दवाओं का यह केस सिर्फ बेंगलुरु का मामला नहीं है। अगस्त में दिल्ली पुलिस ने कैंसर दवाओं की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि गिरोह चोरी और नकली कैंसर दवाओं का कारोबार करता था। कुछ दवाओं को सरकारी अस्पतालों से डायवर्ट कर ब्लैक मार्केट में भेजे जाने की बात भी सामने आई।
राजस्थान में भी कैंसर दवाओं के कुछ वायल सरकारी सप्लाई चेन और बीकानेर के एक सरकारी अस्पताल तक ट्रेस होने के बाद जांच शुरू हुई। अस्पताल ने दवाओं की हेराफेरी में भूमिका से इनकार किया और कहा कि उसके रिकॉर्ड में राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) से मिली दवाओं का हिसाब मौजूद है।