
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कार्रवाई नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया कानून और चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।
भूपेंद्र यादव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने दावा किया कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि 1950 के बाद से अब तक देश में आठ बार यह प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। वर्तमान में नौवीं बार विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का इतिहास पुराना है। उनके मुताबिक, 1950 से अब तक आठ बार SIR हो चुका है और मौजूदा प्रक्रिया इस क्रम में नौवीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली बार का पुनरीक्षण कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पूरा हुआ था।
यादव ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय उसके कानूनी प्रावधानों को समझना चाहिए।
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनावों में हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संसद में मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले से सहमत नहीं होने पर कांग्रेस के नेता उसकी आलोचना करते हैं। इसी तरह, निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि स्वयं चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया समझाते हुए केंद्रीय मंत्री ने बूथ लेवल एजेंट (BLA) और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि BLA राजनीतिक दल का प्रतिनिधि होता है, जबकि BLO सरकारी स्तर पर नियुक्त अधिकारी होता है। BLO घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित फॉर्म वितरित करता है और जानकारी एकत्र करने तथा सत्यापन की प्रक्रिया में शामिल होता है।
यादव के अनुसार, तकनीक के इस्तेमाल से अब संबंधित जानकारी को निर्वाचन आयोग के ECINet प्लेटफॉर्म पर डिजिटल रूप से अपलोड किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट को भी जानकारी की जांच करने का अवसर मिलता है, ताकि मतदाता सूची में किसी नाम के छूटने की स्थिति में आवश्यक कदम उठाए जा सकें।