
Patna Ganga flood latest news 2026: बिहार में लगातार बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ ने कई इलाकों में जिंदगी की रफ्तार रोक दी है। पटना समेत निचले क्षेत्रों में पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया है और बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित जगहों की तलाश में अपना आशियाना छोड़ने को मजबूर हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ परिवार कई दिनों से ऊंची सड़कों और तटबंधों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
गंगा के उफान ने बिहार के कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारी बारिश के बाद नदी का पानी अपने किनारों को पार कर निचले इलाकों में फैल गया। कई रिहायशी क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कई फीट तक भरने से घरों में रखा सामान, कपड़े और खाने-पीने की चीजें बर्बाद हो गईं। प्रभावित परिवारों के सामने अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
पटना के एक निवासी सुरेश साहा ने PTI (Press Trust of India) को बताया कि उनका मकान पिछले तीन दिनों से करीब 7 से 8 फीट गहरे पानी में डूबा हुआ है। उनके मुताबिक परिवार के पास पीने का पानी और भोजन तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी इलाके का जायजा लेकर चले जाते हैं, लेकिन राहत सामग्री पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही।
वहीं, रामकली देवी ने PTI से बातचीत में बताया कि बाढ़ के कारण परिवार को सड़क किनारे रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनके अनुसार पीने के पानी, भोजन और साफ-सफाई की सुविधा का अभाव है। घर में रखा आटा, चावल और दाल समेत जरूरी सामान पानी में बह गया।
बाढ़ का असर सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है। जिन परिवारों ने किसी तरह घर छोड़ा, उन्हें ऊंची सड़कों, तटबंधों और अस्थायी प्लास्टिक टेंटों में शरण लेनी पड़ रही है। बारिश और जलभराव के बीच इन अस्थायी ठिकानों में रहना खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए मुश्किल हो सकता है।
बिहार में गंगा का बढ़ता जलस्तर हर साल निचले इलाकों के लिए गंभीर चुनौती बनता है। गंगा के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने और लगातार बारिश होने पर बाढ़ का दायरा तेजी से फैल सकता है। ऐसे हालात में राहत शिविरों तक साफ पानी, तैयार भोजन, दवाइयां, स्वच्छता सुविधाएं और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था बेहद अहम हो जाती है।