
पटना। कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों… इस कहावत को बिहार के कटिहार की 13 वर्षीय मासूम लक्ष्मी ने सच कर दिखाया है। शारीरिक लाचारी और विपरीत परिस्थितियों को अपने मजबूत हौसलों के आगे झुकाते हुए लक्ष्मी ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी रुकावट भी रास्ता नहीं रोक सकती।
दोनों हाथों से दिव्यांग लक्ष्मी पढ़ाई के प्रति अपने जुनून के चलते पैरों की उंगलियों में पेन थामकर अपनी तकदीर लिख रही है। कक्षा में अन्य बच्चों की तरह ही वह सामान्य रूप से अपनी किताबें संभालती है और पैरों से ही फर्राटेदार लिखती है। उसकी इस जिजीविषा और अद्भुत प्रतिभा को देखकर हर कोई हैरान है।
लक्ष्मी की खबर सामने आते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। छात्रा की मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने उसके स्कूल का दौरा किया और उसकी जरूरतों का जायजा लिया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. आयुष भारद्वाज ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल पहुंचकर लक्ष्मी से मुलाकात की। जांच में सामने आया कि उसके पास बीते वर्ष जारी किया गया 'यूडीआईडी' (यूनिक डिसएबिलिटी आईडी) कार्ड पहले से मौजूद है।
डॉ. भारद्वाज ने आगे बताया कि लक्ष्मी के पास यूडीआईडी कार्ड पहले से होने के कारण अब उसे अन्य सरकारी सहायता और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना आसान होगा। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के उच्च अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि उसे जल्द ही आवश्यक उपकरण व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। बता दें कि दिव्यांगजनों के लिए 'यूडीआईडी' कार्ड केंद्र सरकार की एक पारदर्शी पहल है, जिससे देश भर के दिव्यांगों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया जाता है।