तमिलनाडु में ‘उत्तर-दक्षिण’ के नैरेटिव को तोड़ने की रणनीति पर भाजपा काम कर रही है। गृहमंत्री अमित शाह के दो दिवसीय दौरे से एनडीए का चुनावी एजेंडा तय होगा।
जिस तरह से सत्ताधारी डीएमके ने हिंदी, हिंदुत्व और ’उत्तर और दक्षिण’ के नैरेटिव को धार देने की कोशिश की है, उससे भाजपा ने तमिलनाडु के चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। इस साल मार्च में संभावित विधानसभा चुनाव में एनडीए का परचम लहराकर भाजपा इस नैरेटिव को ध्वस्त करना चाहती है।
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि यहां 6 प्रतिशत अतिरिक्त वोटों से होकर सत्ता का रास्ता जाता है। 2021 का विधानसभा चुनाव हो या फिर 2024 का लोकसभा चुनाव, दोनों मौकों पर हार-जीत के बीच अंतर 5 से 6 प्रतिशत वोटों का रहा। अब एनडीए नए-नए जाति समूहों और संगठनों को पाले में लाकर वोटों के इंस अंतर को खत्म करने में जुटा है।
गृहमंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु में चुनावी कमान खुद संभाली है। एक बार फिर वे पार्टी की चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए रविवार से तमिलनाडु के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने राज्य में भाजपा संगठन में जान फूंकने के लिए पूरे राज्य में यात्रा शुरू की है। पुदुक्कोट्टई में रविवार सायं इस दौरे के समापन पर गृहमंत्री अमित शाह सभा को संबोधित कर माहौल बनाएंगे।
2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने के बावजूद भाजपा 18.28 प्रतिशत यानी 79 लाख से अधिक वोट हासिल करने में सफल रही। दक्षिण भारत के इस प्रमुख राज्य में पहली बार भाजपा अकेले दहाई में वोट शेयर पहुंचाने में सफल रही। 2021 के विधानसभा चुनाव में कुल 234 सीटों में से सत्ताधारी डीएमके गठबंधन को 159 सीटें तो भाजपा-एआइएडीएमके को 75 सीटों से संतोष करना पड़ा था।