राज्यसभा में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग की। उन्होंने मौर्य साम्राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का हवाला देते हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान केंद्र सरकार से प्राचीन नाम बहाल करने का आग्रह किया। (
राज्यसभा में बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलने की मांग उठी है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (एएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बुधवार को पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई। उन्होंने इसके लिए मौर्य साम्राज्य के दौरान इसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का हवाला दिया।
उन्होंने यह मांग राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान की। बहस में हिस्सा लेते हुए कुशवाहा ने केंद्र सरकार से शहर का प्राचीन नाम बहाल करने का आग्रह किया।
कुशवाहा ने सदन में कहा- पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, जिसे आज पटना के नाम से जाना जाता है। पाटलिपुत्र नाम हमें गर्व से भर देता है। इसलिए, हम सरकार से पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने का आग्रह करते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू के अभिभाषण का जिक्र करते हुए कुशवाहा ने कहा- राष्ट्रपति ने कहा कि जब देश हमारे पूर्वजों के महान मील के पत्थरों और योगदानों को याद करता है, तो यह नई पीढ़ी को प्रेरित करता है और एक विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा को गति देता है। ये शब्द हमें उस युग की याद दिलाते हैं जब भारत को 'सोने की चिड़िया' के नाम से जाना जाता था।
राज्यसभा में बोलते हुए कुशवाहा ने मौर्य साम्राज्य के विशाल विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत की सीमाएं आज के बांग्लादेश, भूटान, अफगानिस्तान और नेपाल तक फैली हुई थीं।
उन्होंने कहा- उस गौरवशाली युग के प्रतीक आज भी अतीत के अवशेषों के रूप में हमारे सामने मौजूद हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि उस इतिहास पर जमी धूल को हटाएं और उसे फिर से जीवंत करें।
कुशवाहा ने अन्य शहरों और राज्यों का जिक्र करते हुए कहा- कलकत्ता का नाम बदलकर कोलकाता, उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा और बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई कर दिया गया। जब इन जगहों के नाम बदले जा सकते हैं, तो पटना का नाम पाटलिपुत्र क्यों नहीं बदला जा सकता?