
सोशल मीडिया नैरेटिव में पिछड़ने और हाल ही में हुए छात्र आंदोलन के दौरान जेन-ज़ी की बदलती डिजिटल पसंद के साथ कदमताल नहीं कर पाने के कारण बीजेपी (BJP) को अपनी शक्तिशाली समझी जाने वाली आइटी सेल (IT Cell) यानी सोशल मीडिया टीम (Social Media Team) को बदलना पड़ा। करीब 11 साल से पार्टी का सोशल मीडिया संभाल रहे अमित मालवीय (Amit Malviya) की जगह अब दीपक म्हस्के (Deepak Mhaske) की पांच सदस्यीय टीम को ज़िम्मेदारी दी गई है।
हाल ही में हुए जेन-ज़ी प्रदर्शनों के दौरान इंस्टाग्राम रील्स, मीम्स और शॉर्ट वीडियो के ज़रिए बने नैरेटिव ने भी पार्टी के सामने नई चुनौती रखी है। ऐसे में नई टीम की लोगों तक पार्टी का संदेश पहुंचाने के साथ जेन-ज़ी को एंगेज करने, उनसे संवाद कायम करने और तेजी से बदलते डिजिटल नैरेटिव को समझकर उस पर प्रतिक्रिया देने की ज़िम्मेदारी होगी।
2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया की मज़बूत भूमिका रही। पार्टी ने सोशल मीडिया पर समर्थकों का बड़ा डिजिटल नेटवर्क तैयार किया और विपक्षी नैरेटिव पर बीजेपी का नैरेटिव भारी पड़ा। पिछले करीब एक साल में यूजीसी और छात्र-युवा आंदोलनों और विभिन्न मुद्दों पर इंस्टाग्राम रील्स, मीम्स, शॉर्ट वीडियो और ट्रेंडिंग कंटेंट के मामले में डिजिटल नैरेटिव को बीजेपी उतनी तेज़ी से पकड़ और काउंटर नहीं कर पाई।
बीजेपी की नई सोशल मीडिया टीम के सामने कई चुनौती रहेंगी। सोशल मीडिया टीम को पार्टी का नैरेटिव बनाने के साथ ही विपक्ष के नैरेटिव का प्रभावी जवाब भी देना होगा। पार्टी के खिलाफ प्रोपेगेंडा को कमजोर करना और उसका करारा जवाब देना भी नई सोशल मीडिया टीम के लिए ज़रूरी होगा। जेन-ज़ी को साधने के लिए रील्स, मीम्स और हल्के-फुल्के कंटेंट के साथ राजनीतिक संदेश जोड़ना होगा। एक्स (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स के लिए अलग-अलग रणनीति बनानी होगी। पार्टी की योजनाओं और उनके फायदों को जनता तक पहुंचाना भी अहम होगा। सभी राज्यों और अलग-अलग सामाजिक समूहों के स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय डिजिटल रणनीति से जोड़कर उस हिसाब से काम करना होगा।