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54 नदियां और अनसुलझा तीस्ता समझौता, जानिए भारत-बांग्लादेश जल विवाद पर MEA ने क्या कहा

बांग्लादेश के साथ तीस्ता और जल बंटवारे से जुड़े मामलों पर भारत द्विपक्षीय 'संयुक्त नदी आयोग'के माध्यम से वार्ता करेगा।
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teesta water dispute

तीस्ता प्रोजेक्ट पर भारत और बांग्लादेश के बीच वार्ता, photo source@ANI

भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि तीस्ता और जल-बंटवारे से जुड़े अन्य मुद्दों पर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत द्विपक्षीय 'संयुक्त नदी आयोग' (Joint Rivers Commission) और पूर्व-निर्धारित माध्यमों के जरिए जारी रहेगी। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि तीस्ता नदी परियोजना पर नई दिल्ली का रुख ढाका को पहले ही अवगत कराया जा चुका है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने तीस्ता मुद्दे पर बांग्लादेश के रुख से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां साझा हैं और जल से संबंधित मामलों को तय द्विपक्षीय व्यवस्था के तहत ही सुलझाया जाता है।

दोनों देशों के बीच 54 नदियां साझा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "बांग्लादेश और भारत के बीच कई नदियां साझा हैं। सटीक आंकड़ों की बात करें, तो दोनों देशों के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं। जल से संबंधित कोई भी सहयोग या चर्चा, जो दोनों देशों के मध्य होनी है, वह द्विपक्षीय 'संयुक्त नदी आयोग' और तय वार्ता तंत्रों के माध्यम से ही की जाएगी।"

तीस्ता जल विवाद भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चला आ रहा एक प्रमुख मुद्दा रहा है, जिसमें जल-बंटवारे और नदी प्रबंधन से जुड़ी व्यापक चिंताएं शामिल हैं। बांग्लादेश तीस्ता के जल में न्यायसंगत हिस्सेदारी चाहता है, लेकिन एक व्यापक जल-बंटवारा समझौता अब तक लंबित है, जिसका एक मुख्य कारण पश्चिम बंगाल सरकार का अपनी जल आवश्यकताओं को लेकर किया जा रहा विरोध है।

तीस्ता का मुद्दा अब तक अनसुलझा

दोनों देश 54 नदियां साझा करते हैं और 1996 की ऐतिहासिक 'गंगा जल संधि' के तहत फरक्का बैराज पर शुष्क (सूखे) मौसम में जल-बंटवारे का नियम तय है। हालांकि, कई दौर की द्विपक्षीय वार्ताओं के बावजूद तीस्ता का मुद्दा अब तक अनसुलझा ही है।

वर्ष 2011 में प्रस्तावित एक समझौते के तहत तीस्ता के पानी का 42.5 प्रतिशत हिस्सा भारत को और 37.5 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश को आवंटित करने की बात कही गई थी, जबकि शेष हिस्सा अन्य आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रखा गया था। हालांकि, पश्चिम बंगाल के कड़े विरोध के कारण यह प्रस्ताव लागू नहीं किया जा सका।

भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि बांग्लादेश के साथ जल-संबंधी मामलों पर बातचीत तय द्विपक्षीय तंत्रों के जरिए ही की जाती है, जिनकी बैठकें समय-समय पर आयोजित होती हैं। पिछले महीने तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनरुद्धार परियोजना पर भारत का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि इस मुद्दे पर नई दिल्ली का दृष्टिकोण बांग्लादेश को पहले ही स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है।