Political Mandate: बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल ने खलबली मचा दी है। जानें क्या मुंबई की जनता ने महायुति के विकास पर मुहर लगाई है या फिर उद्धव ठाकरे की सहानुभूति की लहर काम कर गई।
BMC Election Exit Poll 2026: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के 227 वार्डों के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान संपन्न हुए चुनावों (Mumbai Municipal Election) ने देश की सियासत का पारा (BMC Exit Poll 2026) गर्म कर दिया है। तकरीबन 75,000 करोड़ रुपये के सालाना बजट वाली इस महानगरपालिका को "एशिया की सबसे अमीर निकाय" कहा जाता है। यही वजह है कि इसके एग्जिट पोल के आंकड़े न केवल मुंबई, बल्कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा रहे हैं।
विभिन्न सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल के अनुसार, मुकाबला बेहद कड़ा और त्रिकोणीय नजर आ रहा है:
महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना BJP Shiv Sena Conflict): एग्जिट पोल के आंकड़े महायुति को बढ़त दिखा रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनावों की जीत का 'मोमेंटम' यहाँ भी नजर आ रहा है।
महाविकास आघाड़ी (Mahayuti vs MVA): उद्धव ठाकरे की सेना, शरद पवार की NCP और कांग्रेस के बिखराव के बावजूद उद्धव-राज ठाकरे के 'भाई-भाई' फैक्टर ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
अन्य खिलाड़ी: राज ठाकरे की मनसे और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
विभिन्न एजेंसियों (Axis My India, JVC, Sakal) के आंकड़ों को जोड़कर देखें, तो मुंबई की सत्ता का समीकरण कुछ इस प्रकार नजर आता है:
ज्यादातर एग्जिट पोल (Axis My India: 131-151 सीटें) संकेत दे रहे हैं कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा की जोड़ी ने मुंबई के मतदाताओं को अपनी ओर खींचने में सफलता पाई है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को कुछ एग्जिट पोल में 60 से 80 के बीच सीटें मिल रही हैं।
सिर्फ सीटें ही नहीं, वोट प्रतिशत में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं:
यह चुनाव केवल गटर, सड़क और पानी का मुद्दा नहीं है; इसके परिणाम भारत की राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर डालेंगे:
I.N.D.I.A. ब्लॉक के लिए बीएमसी चुनाव एक लिटमस टेस्ट है। यदि विपक्ष मुंबई में हारता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े हो जाएंगे। वहीं, उद्धव ठाकरे के लिए यह उनके राजनीतिक अस्तित्व और 'असली शिवसेना' की पहचान की लड़ाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए मुंबई पर कब्जा करना उनके 'मिशन 2029' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश की आर्थिक राजधानी पर नियंत्रण का मतलब है—देश की अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट हब पर राजनीतिक प्रभाव। एग्जिट पोल में बीजेपी की मजबूती यह संकेत दे रही है कि शहरी मतदाता अभी भी 'डबल इंजन' सरकार के विकास मॉडल पर भरोसा कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर यह बहस चल रही है कि क्या क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय पार्टियों के सामने टिक पाएंगे? बीएमसी के नतीजे यह तय करेंगे कि महाराष्ट्र की राजनीति में 'ठाकरे ब्रांड' और 'पवार ब्रांड' का कितना वजन बचा है।
टोल माफी और बुनियादी ढांचा: महायुति की ओर से मुंबई में टोल माफी और कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट्स गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
उद्धव ठाकरे का 'मराठी मानुस' का नारा और बीजेपी का 'हिंदुत्व' कार्ड, दोनों के बीच मतदाताओं का ध्रुवीकरण देखने को मिला है।
भ्रष्टाचार के आरोप: 90,000 करोड़ के रिजर्व में से फंड गायब होने के आरोपों ने इस बार के चुनाव को काफी आक्रामक बना दिया।
बहरहाल, बीएमसी का बजट कई छोटे राज्यों (जैसे सिक्किम या गोवा) के बजट से भी बड़ा है। ऐसे में जो पार्टी बीएमसी पर राज करती है, उसके पास वित्तीय संसाधनों का असीमित भंडार होता है, जिसका उपयोग वह आगे के बड़े चुनावों में कर सकती है। यही कारण है कि इसे 'मिनी इंडिया' का चुनाव कहा जाता है।