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BRICS में दुनिया को भारत ने क्या संदेश दिया? मोदी की कूटनीति, मतभेदों के बावजूद कैसे बनी सहमति?

India BRICS Summit: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते झगड़ों, रूस-यूक्रेन युद्ध के चौथे साल में भी जारी रहने और अमेरिका के बार-बार टैरिफ नियमों में बदलाव करने के बावजूद ब्रिक्स 2026 में भारत ने बंटी दुनिया के बीच आखिर क्या संदेश दिया?
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India BRICS Summit
ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन। फोटो में पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग और रूस के प्रेसिडेंट पुतिन (सोर्स-आईएएनएस)

India BRICS Summit 2026: दुनिया इस समय कई मोर्चों पर तनाव से जूझ रही है। मिडिल-ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष जारी हैं। दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन पिछले 4 सालों से जंग लड़ रहे हैं। अमेरिका की टैरिफ नीतियों को लेकर भी सवाल है। ऐसे माहौल में भारत में हुआ ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन खास रहा। सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब सदस्य देशों के बीच मतभेद हैं, तो क्या कोई साझा रास्ता निकल पाएगा? नई दिल्ली डिक्लेरेशन का सामने आना इस सवाल का जवाब बनकर आया।

मतभेदों के बीच बनी सहमति

BRICS सम्मेलन ने दिखाया कि अलग-अलग विचार रखने वाले देश भी साझा मुद्दों पर साथ आ सकते हैं। सदस्य देशों ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन को स्वीकार किया। इसमें सहयोग, मल्टीलेटरलिज्म और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया गया।

भारत ने साफ किया कि BRICS सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह नहीं है। यह ग्लोबल साउथ के लिए अपनी आवाज उठाने का अहम मंच बन रहा है। भारत ने टकराव के बजाय बातचीत और सहयोग को प्राथमिकता देने की बात रखी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा ग्लोबल सिस्टम पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इसे ‘प्रिविलेज के पिरामिड’ जैसा बताया। उनका कहना था कि ग्लोबल साउथ संकटों का सबसे ज्यादा सामना करता है। लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में उसकी आवाज अपेक्षाकृत कम सुनाई देती है।

मोदी की कूटनीति का फोकस क्या रहा?

भारत ने सम्मेलन के दौरान एक अलग तरह की कूटनीति पर जोर दिया। इसका आधार बातचीत और संवाद रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मतभेदों के बावजूद बातचीत के रास्ते बंद नहीं होने चाहिए। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला बनाने की जरूरत बताई। उनका जोर ऐसे प्लेटफॉर्म पर रहा जहां हर देश की आवाज सुनी जाए। विकास और मानव कल्याण को भी वैश्विक प्रयासों के केंद्र में रखा जाए।

भारत के लिए BRICS की ताकत उसकी विविधता में है। सदस्य देशों की सोच अलग हो सकती है। उनके हित भी अलग हो सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद सहयोग की गुंजाइश बनी रह सकती है। यही भारत के संदेश का अहम हिस्सा रहा।

ईरान-UAE मुलाकात ने बढ़ाया कूटनीतिक महत्व

सम्मेलन के दौरान एक और घटना ने ध्यान खींचा। 11 सितंबर को भारत मंडपम में UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और बातचीत की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव और मतभेद गहरे हैं।

इस मुलाकात का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के सभी मतभेद खत्म हो गए। लेकिन बातचीत का होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। यही BRICS जैसे मंच की उपयोगिता भी दिखाता है।

भारत लंबे समय से कहता रहा है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। नई दिल्ली सम्मेलन ने इसी सोच को आगे बढ़ाया। संदेश साफ है। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद के दरवाजे खुले रहने चाहिए। यही बंटी हुई दुनिया में भारत के BRICS मोमेंट की सबसे बड़ी तस्वीर है।

Updated on:
13 Sept 2026 05:09 pm
Published on:
13 Sept 2026 05:09 pm