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BRICS Summit India: ब्रिक्स पर भारत का बड़ा दांव, ईरान से चाबहार और रूस से सुखोई फाइटर पर होंगे समझौते, जानें प्रमुख मुद्दे

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स सम्मेलन में भारत का जोर राजनीतिक मुद्दों के बजाय सीमा-पार कारोबार, डिजिटल भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को आसान बनाने पर रहेगा। भारत चीन, रूस, खाड़ी देशों और ईरान के साथ व्यापार व रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की तैयारी में है।
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Updated: 10 Sep 2026, 10:46 AM IST
BRICS Summit 2026
BRICS Summit 2026 (Photo-IANS)

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। राजधानी दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में इस बार भारत का मुख्य जोर राजनीतिक मुद्दों से ज्यादा सीमा-पार कारोबार और भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने पर रहेगा। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और टैरिफ को लेकर अमरीका से आई तल्खी के बीच भारत की कोशिश ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, डिजिटल भुगतान, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन और आपूर्ति शृंखला का ऐसा तंत्र विकसित करने की है, जिसमें उसकी अहम भूमिका हो।

इससे न केवल आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि डॉलर पर निर्भरता घटाने का रास्ता भी खुलेगा। भारत सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। इसी के तहत चीन से सीधी उड़ानों और व्यापार विस्तार, रूस से एसयू-57 लड़ाकू विमान और रक्षा सहयोग, खाड़ी देशों से ऊर्जा व स्थानीय मुद्रा में भुगतान तथा ईरान से चाबहार बंदरगाह और व्यापार गलियारे जैसे मुद्दों पर अलग-अलग बातचीत की तैयारी है। भारत ने ब्रिक्स व अन्य साझेदार देशों के साथ प्राथमिकता के अनुसार द्विपक्षीय एजेंडा तैयार किया है।

चीन: सीधी उड़ान और व्यापार विस्तार

वर्ष 2020 के सीमा संघर्ष के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी। प्रत्यक्ष उड़ान और सीमा-पार व्यापार फिर शुरू हो चुके हैं। अब उड़ानों को 2020 से पहले के स्तर तक बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार पिछले वर्ष करीब 155 अरब डॉलर था। लेकिन भुगतान व्यवस्था में सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को लेकर भारत सतर्क है। अलीपे-प्लस को यूपीआइ से जोडऩे का प्रस्ताव भी इसी कारण अटका हुआ है।

प्रमुख मुद्दे

-व्यापार संतुलन
-चीन के बाजार में पहुंच
-चीनी कंपनियों के लिए शर्तें
-इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और विनिर्माण
-सीमा पर शांति और स्थिरता
-प्रत्यक्ष उड़ानों का विस्तार

रूस : रुपया-रूबल में ट्रेड, जेट, तेल और रक्षा सहयोग

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भारत की बातचीत में सुखाई एसयू-57 फाइटर जेट की खरीद, तेल, ऊर्जा, रक्षा, भुगतान व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। रूस से तेल का मुद्दा भी अमरीका की टेढ़ी नजर के चलते जटिल हो गया है। इसलिए भारत सोच-समझकर कदम उठा रहा है। वहीं सीमापार भुगतान मुद्रा में रूस कदम आगे बढ़ा सकता है।

प्रमुख मुद्दे

-तेल और ऊर्जा भुगतान
-रुपया-रूबल व्यापार
-रक्षा उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण
-लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य सहयोग
-परमाणु ऊर्जा, उर्वरक
-परिवहन गलियारे

ब्राजील : कृषि और खाद्य सुरक्षा

ब्राजील के साथ भारत का जोर कृषि तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, जैव ईंधन, उर्वरक और जलवायु-अनुकूल खेती पर रहेगा। ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया के करीब एक-तिहाई खाद्य उत्पादन से जुड़े हैं, इसलिए कृषि आपूर्ति शृंखला और खाद्य सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

ईरान : चाबहार से व्यापार गलियारे तक

ईरान से बातचीत में भारत के लिए चाबहार बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, मध्य एशिया और रूस तक व्यापार संपर्क, ऊर्जा और स्थानीय मुद्रा में व्यापार अहम होंगे।

संयुक्त अरब अमीरात : रुपया-दिरहम और निवेश

संयुक्त अरब अमीरात भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर आसानी है। ब्रिक्स के मंच पर भारत इसे दूसरे देशों तक बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

सऊदी अरब: तेल, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा

सऊदी अरब के साथ बातचीत का केंद्र कच्चा तेल, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और पेट्रो-रसायन रहेगा। इसमें भारत के लिए प्राथमिकता में यह मुद्दे होंगे।

इंडोनेशिया: समुद्री व्यापार और खनिज

इंडोनेशिया के साथ रुपया-रुपियाह में व्यापार, कोयला, ऊर्जा, पाम तेल, डिजिटल भुगतान, महत्वपूर्ण खनिज और हिंद-प्रशांत सहयोग पर जोर।

मिस्र, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका

मिस्र के साथ स्वेज नहर, समुद्री व्यापार, खाद्य सुरक्षा, उर्वरक और अफ्रीकी बाजार अहम होंगे। इथियोपिया के साथ कृषि, दवा, स्वास्थ्य, डिजिटल ढांचा, शिक्षा और कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने की तैयारी है। दक्षिण अफ्रीका के साथ संयुक्त राष्ट्र सुधार और व्यापार के मुद्दे उठेंगे।

दिल्ली तैयार : सुरक्षा कड़ी, रूट डायवर्ट

ब्रिक्स का आयोजन भारत मंडपम में होगा। गुरुवार से ब्रिक्स प्रतिनिधियों का आना शुरू हो जाएगा। सभी प्रीमियम होटल फुल हो गए हैं। दिल्ली में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसे देखते हुए 11 सितंबर से कई रूट डायवर्ट किए गए हैं।

ब्रिक्स के 11 सदस्य

ब्राजील
रूस
भारत
चीन
दक्षिण अफ्रीका
मिस्त्र
इथियोपिया
ईरान
संयुक्त अरब
अमीरात
सऊदी अरब
इंडोनेशिया

10 साझेदार देश

बेलारूस
बोलीविया
क्यूबा
कजाखस्तान
मलेशिया
नाइजीरिया
थाईलैंड
युगांडा
उज्जेकिस्तान
वियतनाम

Updated on:
10 Sep 2026, 10:46 AM IST
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