
बैंक से फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोन लेने और फिर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए सालों तक फरार रहने वाले आरोपी को आखिरकार सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को बिहार के पुनपुन से बैंक धोखाधड़ी के आरोपी राजा बिहारी को गिरफ्तार किया। वह इस मामले में लंबे समय से फरार था और अदालत उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी थी।
राजा बिहारी पर बैंक अधिकारियों और बिचौलियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लेने का आरोप है। सीबीआई के मुताबिक, राजा बिहारी ने पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित इलाहाबाद बैंक (अब इंडियन बैंक) की शाखा से कैश क्रेडिट (सीसी) लोन लिया था।
इस लोन को हासिल करने के लिए उसने कथित तौर पर बैंक अधिकारियों और बिचौलियों के साथ मिलकर साजिश रची थी। जांच में सामने आया कि लोन लेने के लिए फर्जी जमीन के कागजात, संपत्ति से जुड़े नकली दस्तावेज और जाली गारंटर की जानकारी का इस्तेमाल किया गया था।
इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन मंजूर कराया गया। इस मामले में केवल राजा बिहारी ही नहीं, बल्कि बैंक से जुड़े लोगों समेत कुल 21 आरोपियों को नामजद किया गया था।
इस बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून, 1988 के तहत केस दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद 30 अक्टूबर 2009 को 21 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
अदालत ने 12 नवंबर 2009 को चार्जशीट पर संज्ञान भी ले लिया था। यानी मामला कानूनी कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच चुका था, लेकिन राजा बिहारी जांच में शामिल होने से बचता रहा।
सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने शुरुआत से ही जांच में सहयोग नहीं किया और लगातार फरार रहा। वह अदालत में पेश होकर मुकदमे का सामना करने से भी बचता रहा। काफी समय तक उसका कोई पता नहीं चल पाया।
लगातार फरार रहने और कानूनी प्रक्रिया से बचने के कारण सक्षम अदालत ने राजा बिहारी को घोषित अपराधी करार दिया था। इसके बाद उसकी तलाश जारी थी।
सीबीआई को मिली खुफिया जानकारी और लगातार की गई कोशिशों के बाद जांच एजेंसी की एक विशेष टीम आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। टीम ने गुरुवार को बिहार के पुनपुन इलाके में उसका पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।