
उमर खालिद और शरजील इमाम (फोटो-IANS)
उमर खालिद और शरजील इमाम ने दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में अपनी जमानत के लिए अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले जमानत याचिकाओं को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
इन दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर कर दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है। जिसमें 30 सितंबर को तीसरी बार उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।
उमर खालिद और शरजील इमाम ने दिल्ली हाई कोर्ट में कड़कड़डूमा कोर्ट के 4 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। इससे पहले निचली अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने याचिकाओं पर सुनवाई की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पहले वाले आदेश का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को नियमित जमानत देने से मना कर दिया था। हालांकि, अदालत ने दोबारा जमानत मांगने का रास्ता खुला रखा था। आदेश के मुताबिक, मामले के सुरक्षित और गोपनीय गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद या आदेश के एक साल पूरे होने पर, यदि ट्रायल में देरी होती है तो दोनों निचली अदालत में फिर से जमानत की अर्जी लगा सकते हैं। इसी आदेश को आधार बनाकर ट्रायल कोर्ट ने उनकी तीसरी जमानत याचिका खारिज की थी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया था। पुलिस ने अपनी दलील में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली दंगों की साजिश का मास्टरमाइंड और कमांड अथॉरिटी बताया। पुलिस के मुताबिक, इस समय उनकी जमानत याचिकाएं दाखिल करना जल्दबाजी है और कानूनी आधार पर भी उचित नहीं है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में भड़के दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान हुई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी साजिश के मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से कुछ आरोपियों को बाद में जमानत मिल चुकी है। उमर खालिद और शरजील इमाम पर दंगों की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं।
Updated on:
5 Nov 2026, 6:17 PM IST
Published on:
5 Nov 2026, 5:41 PM IST
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