
Bombay High Court (Photo-ANI)
Waze bail cancelled: बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2021 के एंटीलिया बम कांड और व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील को स्वीकार करते हुए विशेष एनआईए कोर्ट के 29 सितंबर के जमानत आदेश को खारिज कर दिया है।
विशेष एनआईए कोर्ट द्वारा 29 सितंबर को जमानत दिए जाने के बाद, हाई कोर्ट ने 30 सितंबर को इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिससे वाजे जेल से बाहर नहीं आ सके थे। वहीं जमानत खारिज होने के बाद सचिन वाजे अभी भी ठाणे सेंट्रल जेल में ही बंद रहेंगे।
एनआईए ने 29 सितंबर को एक विशेष अदालत द्वारा सचिन वाजे को दी गई जमानत को चुनौती दी थी। अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य का बयान न होने की बात पर गौर करते हुए, विशेष अदालत ने वाजे के खिलाफ 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाने की औचित्यता पर सवाल उठाया था।
हाई कोर्ट में अपील के दौरान, NIA की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि विशेष न्यायाधीश का आदेश गलत था। उन्होंने बताया कि एंटीलिया के सुरक्षा कर्मियों के बयान तो दर्ज किए ही गए थे।
उन्होंने तर्क दिया कि वाजे ने मुकेश अंबानी के घर के बाहर जिलेटिन से भरी SUV इसलिए खड़ी की थी ताकि वह जबरन वसूली कर सके और एक आतंकी साजिश का नाटक रच सके। उसकी योजना यह थी कि वह खुद ही इस मामले को सुलझा ले और खुद को एक 'सुपरकॉप' के रूप में पेश करे। जब गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन ने इस मामले का सारा दोष अपने सिर लेने से इनकार कर दिया, तो उसे रास्ते से हटा दिया गया, क्योंकि वह इस साजिश में एक 'कमजोर कड़ी' बन गया था।
वाजे की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट वी.एम. थोराट ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर NIA की कहानी को सच मान भी लिया जाए, तो भी अपना रसूख वापस पाने के लिए डर का माहौल बनाना UAPA की धारा 15 के तहत 'आतंकवाद' की श्रेणी में नहीं आता है।
वाजे के वकील सीनियर एडवोकेट वी.एम. थोराट ने तर्क दिया कि बिना डेटोनेटर के जिलेटिन की छड़ों का इस्तेमाल करके किसी एक परिवार को डराने से आम जनता में दहशत नहीं फैलती। उन्होंने यह भी कहा कि हिरेन की हत्या करना 'आतंकी कृत्य' नहीं, बल्कि सबूतों को मिटाने की कोशिश थी।
थोराट ने वाजे की जमानत की मांग करते हुए कहा कि वह पिछले पांच साल से जेल में है और सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर उसे भी जमानत मिलनी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, आज कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
Updated on:
5 Nov 2026, 6:00 PM IST
Published on:
5 Nov 2026, 5:39 PM IST
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.