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CBSE ने मूल्यांकन प्रणाली में किया बदलाव, सिर्फ अंकों की मार्कशीट नहीं, होलिस्टिक कार्ड से खुलेगा काबिलियत का चिट्ठा

CBSE 2026-27 Changes: अब नर्सरी से लेकर 8वीं तक के बच्चों के लिए बोर्ड ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और अभिभावकों के लिए विशेष पेरेंटिंग कैलेंडर का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।

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May 05, 2026
CBSE अपडेट्स (AI जनरेटेड फोटो)

CBSE New Education Policy Assessment: सीबीएसई सत्र 2026-27 से अंकों के आधार पर होने वाले मूल्यांकन प्रणाली को खत्म करने जा रही है। अब नर्सरी से लेकर 8वीं तक के बच्चों के लिए बोर्ड ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और अभिभावकों के लिए विशेष पेरेंटिंग कैलेंडर का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इसमें बच्चे का केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि उसके व्यवहार, हुनर और मानसिक विकास का पूरा लेखा-जोखा होगा। फिलहाल इसे नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू किया जा रहा है। अगले चरण में नौवीं से 12 वीं कक्षा से इसे शुरू किया जाएगा। सीबीएसई ने इस संबंध में स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

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रिपोर्ट कार्ड में क्या नया-

  • 360 डिग्री पर आंकलन : अभी शिक्षक ही बच्चे को अंक देते हैं, लेकिन अब 'होलिस्टिक कार्ड' के जरिए बच्चे केविकास को 360 डिग्री पर मापा जाएगा।
  • बच्चा खुद देगा नंबर- छात्र खुद अपनी प्रगति का आंकलन करेगा कि उसने क्या नया सीखा।
  • साथियों की राय : क्लास के दूसरे बच्चे भी फीडबैक देंगे कि छात्र का सामाजिक व्यवहार और टीम वर्क कैसा है।
  • हुनर को जगह : इसमें पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स, कला और रचनात्मकता के लिए अलग से कॉलम होंगे।

इस तरह के बदलाव भी होंगे-

बदलाव से तालमेल : कोपिंग विद चेंजेस सेक्शन के जरिए पेरेंट्स को सिखाया जाएगा कि वे बदलते सिलेबस और नई उम्मीदों के बीच बच्चे को मानसिक सहारा कैसे दें।
समानता का पाठ : इन्क्लूजन सेक्शन के जरिए बच्चों में संवेदनशीलता और सबको साथ लेकर चलने की भावना विकसित की जाएगी।

खास वर्कशॉप- स्कूल अब माता-पिता के लिए उनकी उम्र और जरूरत के हिसाब से खास ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करेंगे।

रटने की छुट्टी, सीखने की शुरुआत

एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल मंजू शर्मा का कहना है कि सीबीएसई का यह कदम बच्चों को नंबर मशीन बनने से बचाएगा। जब मूल्यांकन का तरीका बदलेगा, तभी रटने की परंपरा खत्म होगी और बच्चे अपनी रुचि के हिसाब से आगे बढ़ सकेंगे।

पेरेंट्स को निर्देश : अनुभवों पर बात साझा करें

  • रोज 15 मिनट बच्चे से उसकी पढ़ाई नहीं, बल्कि उसके दिनभर के अनुभवों पर बात करें।
  • बच्चे की छोटी-छोटी कोशिशों (जैसे किसी की मदद करना या नया आईडिया सोचना) की तारीफ करें।
  • बच्चे के साथ बिना मोबाइल के समय बिताने की आदत डालें।

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