
INDIA Alliance CEC Gyanesh Kumar: नई दिल्ली में चुनावी पारदर्शिता को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच जारी राजनीतिक टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायतें रखने की तैयारी कर रहे INDIA गठबंधन के कार्यक्रम पर बारिश ने पानी फेर दिया। हालांकि, विपक्ष ने पीछे हटने के बजाय इसे एक दिन आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित ‘दिल्ली चलो’ रैली ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन की प्रस्तावित सार्वजनिक कार्यवाही को बारिश के कारण एक दिन के लिए टाल दिया गया है। पहले यह कार्यक्रम शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नई दिल्ली स्थित आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित होना था। अब विपक्षी दल शनिवार को इस कार्यक्रम के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज पर अपने सवाल उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
यह कार्यक्रम विपक्ष की उस व्यापक राजनीतिक मुहिम का हिस्सा है, जिसके तहत चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग उनकी चिंताओं का उचित समाधान करने में विफल रहा है। इसी आधार पर गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है।
प्रस्तावित कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इस कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगी। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे।
विपक्ष की इस पहल को चुनावी प्रक्रिया पर सार्वजनिक बहस तेज करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोपों और मांगों को राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन आरोपों के आधार पर किसी अनियमितता को स्वतः प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर अपना विरोध व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘दिल्ली चलो’ मार्च आयोजित करने की घोषणा भी की है। पार्टी का लक्ष्य इस कार्यक्रम में कम से कम 10 लाख नागरिकों को जुटाना है।
इस प्रस्तावित मार्च के जरिए कांग्रेस चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने सवालों को जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रही है। यदि बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं, तो यह विपक्ष के लिए अपनी राजनीतिक मुहिम को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता देने का अवसर बन सकता है।
चुनावी पारदर्शिता पर बढ़ेगी बहस?
भारत में चुनाव आयोग की भूमिका स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मतदाता सूची, मतदान प्रक्रिया और चुनाव प्रबंधन से जुड़े सवाल राजनीतिक बहस के साथ-साथ संस्थागत जवाबदेही के नजरिए से भी अहम हैं।
अब निगाहें शनिवार को होने वाली प्रस्तावित कार्यवाही और उसके बाद विपक्ष की रणनीति पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए कौन-से कदम उठाता है और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते हैं।