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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी, किसानों को होगा फायदा

केंद्र सरकार ने किसानों के लिए बड़ा फैसला किया है। सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी है। सरकार के इस फैसले से किसानों को फायदा होगा।
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Updated: 21 Apr 2026, 12:51 AM IST
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(File Photo)

केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी है। सरकार के इस फैसले से किसानों को फाफी फायदा होगा। सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को बेहतर दाम दिलाना और देश के बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा सोमवार को जारी बयान में कहा गया है कि यह निर्णय उत्पादन, उपलब्ध भंडार और कीमतों के रुझान की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है।

अब तक 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की मंजूरी

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 10 मार्च 2026 को जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, साल 2025–26 के लिए गेहूं उत्पादन 1,202 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है। सरकार ने अच्छे उत्पादन और पर्याप्त भंडार को देखते हुए अतिरिक्त निर्यात की मंजूरी दी है। इससे पहले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने जनवरी 2026 में 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके बाद फरवरी 2026 में 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों और 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी गई थी। सरकार ने अब तक कुल 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है।

गेहूं की पैदावार बढ़ी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में रबी की सीजन में गेहूं की खेती का क्षेत्र बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है। पिछले साल 2025 में गेहूं के उत्पादन का यह क्षेत्र 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह बढ़ोतरी किसानों के भरोसे को दर्शाती है, जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य और मजबूत खरीद व्यवस्था का समर्थन मिला है। सरकार ने इस साल भी गेहूं की अच्छी फसल होने की संभावना जताई है।

अतरिक्त गेहूं के निर्यात से लाभ

सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी है। इस डील को मिलाकर सरकार इस साल अब तक कुल 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे चुकी है। इसके अलावा सरकार 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की मंजूरी भी दे चुकी है। अतरिक्त गेहूं के निर्यात से बाजार स्थित रहेगा और किसानों को मार्केट में मंदी का सामना नहीं करना होगा।

इसके अलावा भंडारण का बेहतर प्रबंधन होगा और फसल के आने के समय किसानों को मजबूरी में सस्ते दाम पर बिक्री नहीं करने पड़ेगी। अतरिक्त अनाज के निर्यात से घरेलू कीमतों को स्थिर रखने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सरकार ने कहा है कि वह किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने और कृषि क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर ऐसे फैसले लेती रहेगी।

Updated on:
21 Apr 2026, 12:51 AM IST
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