
Chandrima Bhattacharya Resigns: तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शनिवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी चंद्रिमा को मई में हुए विधानसभा चुनावों में टीएमसी को भारी नुकसान होने के बाद पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। हार के बाद ममता ने पार्टी की सभी मौजूदा समितियों को भंग कर दिया और संगठन का पुनर्गठन किया।
सहयोगी चंद्रिमा ने पार्टी नेता ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि वहह जून को संभाले गए इस पद को छोड़ रही हैं। चंद्रिमा ने टीएमसी और उससे जुड़ी संस्थाओं के अलग-अलग बैंक खातों के लिए हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से भी मुक्त किए जाने का अनुरोध किया।
TMC के सभी पदों से चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर पार्टी विधायक कुणाल घोष ने कहा कि मैं इस पर बाद में बात करूंगा, अभी नहीं। कोई भी फ़ैसला ले सकता है, लेकिन जब ममता बनर्जी CM थीं, तब उनके (चंद्रिमा भट्टाचार्य) पास सबसे अहम मंत्रालय था। अब वह घमंड दिखा रही हैं।
चंद्रिमा भट्टाचार्य के पार्टी के पदों से इस्तीफा देने पर पार्टी से निकाले गए TMC विधायक संदीपन साहा ने कहा कि मैं उनके इस कदम का स्वागत करता हूं। यह तो होना ही था। 22 जून को हमारी एक बैठक हुई थी, जिसमें हमने नेशनल वर्किंग कमेटी के चेयरपर्सन और कमेटी के दूसरे सदस्यों के नामों का ऐलान किया था। वे सभी उसमें शामिल हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जिन लोगों को किसी पद पर नियुक्त किया जा रहा है, वे लगातार इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि कालीघाट तृणमूल में काम करने का माहौल ही नहीं है।
TMC से चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर बीजेपी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बीजेपी विधायक शंकर सिकदर ने कहा कि ऐसा तो होना ही था। कहा गया था कि आखिर में इस पार्टी में सिर्फ ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ही बचेंगे, और कोई नहीं बचेगा।
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों में विभाजित हो गई। इसी बीच, टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने भी कम चर्चित नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को समर्थन देने का वादा किया।