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भारत और जापान में नजदीकी और आजाद Indo-Pacific Connection पर चीन क्यों बिफरा,जानिए

India-Japan Ties China Irked: भारत और जापान में नजदीकी और समझौते होना चीन को रास नहीं आ रहा है। चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
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भारत

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MI Zahir

Jul 04, 2026

India-Japan China News.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची व इनसेट में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन (फोटो: ANI. X/ @ Chinese Embin US)

India-Japan Free Indo-Pacific Ties China Irked: भारत और जापान के बीच नजदीकी से चीन बहुत परेशान हो गया है। भारत की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी और जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के बीच गहरा तालमेल है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन की आजादी और नियमों पर आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए 'क्वाड' फ्रेमवर्क के तहत मिलकर काम कर रहे हैं। उसे इन दोनों देशों में यह नजदीकी रास नहीं आ रही है। ध्यान रहे कि नई दिल्ली में गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता हुई। बैठक के दौरान, दोनों देशों ने अपने आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक नया आर्थिक साझेदारी ढांचा पेश किया। इसके अलावा, सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास के लिए एक रक्षा समझौते को भी अंतिम रूप दिया गया।

भारत व जापान कॉमन टारगेट के लिए सहयोग पर सहमत हुए

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समुद्री नीति, जापान की 'आजाद और खुले इंडो-पैसिफिक' की नीति से मेल खाती है, और इसलिए, वे इन साझा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमत हुए।

दोनों देश रिश्ते को भाई-बहन की तरह आगे बढ़ाएंगे: ताकाइची

प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक प्रेस बयान जारी करते हुए, ताकाइची ने कहा कि दोनों नेता एकमत हैं और वे इस रिश्ते को भाई-बहन के रिश्ते की तरह आगे बढ़ाएंगे। वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी समुद्र को एक ऐसी साझा जगह मानते हैं जो क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देती है; वे 'ग्रेट ओशन इनिशिएटिव' को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि हिंद महासागर के देश अपनी संप्रभुता और समुद्री हितों की रक्षा कर सकें। यह कदम 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' नीति के अनुरूप है।

यह क्षेत्रीय देशों की साझा उम्मीदों के खिलाफ : जिंग

चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये के बीच भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग का चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन का शेयर किया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने 'स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक" की आलोचना करते हुए कहा है कि यह क्षेत्रीय देशों की साझा उम्मीदों के खिलाफ है।

इसे कभी भी वास्तविक मान्यता नहीं मिलेगी: गुओ

गुओ ने कहा कि युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों की रक्षा करना समृद्धि की नींव है। यू ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'तथाकथित 'स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक' की अवधारणा क्षेत्रीय देशों की शांति, विकास और सहयोग की साझा आकांक्षाओं के विरुद्ध है और इसे कभी भी वास्तविक मान्यता नहीं मिलेगी।

भारत और जापान में नजदीकी चीन को हजम नहीं हो रही

बहरहाल भारत और जापान के बीच नजदीकी चीन को हजम नहीं हो रही है और उसे यह बहुत बुरा लग रहा है। नई दिल्ली में सालाना शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच हुए रक्षा और आर्थिक समझौतों से बीजिंग की बेचैनी और बढ़ गई है। देखना यह है भारत चीन के इस रुख पर क्या कदम उठाता है।

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