
China Brahmaputra Super Dam: चीन द्वारा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग त्सांगपो) नदी पर बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े सुपर डैम को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला खुलासा हुआ है। खुद चीनी भूवैज्ञानिकों के एक ताजा अध्ययन ने बीजिंग के उन तमाम सुरक्षित दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें इस परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल और आपदा-नियंत्रक बताया जा रहा था। इस बेहद खुफिया और संवेदनशील प्रोजेक्ट के ठीक नीचे एक अति-सक्रिय 'फॉल्ट लाइन' (भूगर्भीय दरार) मिली है, जो किसी भी वक्त बड़े विनाश का सबब बन सकती है।
हांगकांग से प्रकाशित होने वाले प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी हिमालयी क्षेत्र की गहराई में चल रहे इस निर्माण कार्य के नीचे मौजूद पृथ्वी की ठोस परत में एक बड़ी दरार देखी गई है। यह दरार इस विशालकाय बांध की नींव को कभी भी हिलाने का माद्दा रखती है। चीनी भाषा की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'सेडिमेंटरी जियोलॉजी और टेथियन जियोलॉजी' में छपे एक शोध पत्र के मुताबिक, इस दरार को 'पैझेन फॉल्ट' का नाम दिया गया है, जो हिमयुग के समय से ही भूगर्भीय रूप से अत्यधिक सक्रिय और खतरनाक रही है।
सरकारी संस्था 'चाइना जियोलॉजिकल सर्वे' की सीधी निगरानी में हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि सदियों से हो रही टेक्टोनिक हलचलों के कारण बांध के आसपास की विशाल चट्टानें टूटकर अंदरूनी रूप से बेहद कमजोर और खोखली हो चुकी हैं। चीनी इंजीनियर जिस जगह 167.8 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) की लागत से कंक्रीट का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं, वह क्षेत्र किसी भी बड़े भूकंपीय झटके को झेलने की स्थिति में नहीं है। पैझेन क्षेत्र सीधे तौर पर यारलुंग त्सांगपो के निचले हिस्से के जलाशय क्षेत्र के भीतर आता है, जिससे इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
चीन ने पिछले साल जुलाई में इस परियोजना पर आधिकारिक रूप से काम शुरू किया था। इस महा-बाँध का उद्देश्य हर साल 300 अरब किलोवाट-घंटा (यूनिट) से अधिक बिजली पैदा करना है, जिससे चीन की 30 करोड़ से अधिक आबादी की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकें। यह बांध हिमालय की उस सबसे गहरी घाटी में बनाया जा रहा है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने से ठीक पहले एक बहुत ही तीखा 'यू-टर्न' (ग्रेट बेंड) लेती है। इस दुर्गम और संवेदनशील इलाके में चीनी सेना की सीधी देखरेख में भारी-भरकम इंजीनियरिंग मशीनरी तैनात की गई है।
अचानक बाढ़ (Flash Floods) का डरः यदि पैझेन फॉल्ट में सक्रियता के कारण बांध टूटता है, तो तिब्बत का अरबों गैलन पानी कुछ ही मिनटों में भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम को जलमग्न कर देगा। यह पूर्वोत्तर भारत के लिए एक परमानेंट 'वॉटर बॉम्ब' की तरह है।
जल-युद्ध की रणनीति (Water Warfare): सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस बांध के जरिए ब्रह्मपुत्र के पानी के बहाव को नियंत्रित करके भारत के खिलाफ एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।
भूकंपीय जोन-5 में निर्माणः यह पूरा इलाका दुनिया के सबसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों (Zone 5) में आता है। अतीत में भी इस क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं, जिससे पहाड़ों के खिसकने का सिलसिला आम है।
इस खुलासे ने भारत और बांग्लादेश जैसे निचले तटीय देशों की चिंताओं को सच साबित कर दिया है। नई दिल्ली लगातार बीजिंग के इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताता रहा है। तिब्बती पठार के नीचे लगातार गतिशील टेक्टोनिक प्लेटें इस पूरे बुनियादी ढांचे को एक टाइम-बम में तब्दील कर रही हैं। चीनी भूवैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट अब वैश्विक मंच पर चीन के गैर-जिम्मेदाराना बांध निर्माण की नीतियों को बेनकाब करने के लिए एक बड़ा हथियार बन सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर करोड़ों इंसानी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है।