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वकील से मारपीट की घटना के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, CJI सूर्य कांत ने दिया सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक वकील पर हुए कथित हमले पर गहरी चिंता जताई। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने इसे 'गुंडा राज' और कानून के शासन की विफलता करार दिया। कोर्ट ने प्रभावित वकील को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने का निर्देश दिया।
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Updated: 9 Feb 2026, 2:46 PM IST
Justice Surya Kant, CJI of India
चीफ जस्टिस सूर्यकांत। (फोटो- विकिपीडिया/पत्रिका.कॉम)

Supreme Court ने सोमवार को तीस हजारी कोर्ट परिसर में हुई एक वकील पर कथित हमले की घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि न्यायालय में ऐसा 'गुंडा राज' किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस घटना को कानून के शासन की विफलता करार देते हुए प्रभावित वकील को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने का निर्देश दिया।

कोर्टरूम में सभी सदस्यों की मौजूदगी में हुई मारपीट: पीड़ित वकील

CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए वकील ने बताया कि वह तीस हजारी कोर्ट में अपर जिला न्यायाधीश हरजीत सिंह पाल की अदालत में अभियुक्त की ओर से पेश हो रहा था। शिकायतकर्ता के वकील ने कई गुंडों के साथ उसपर हमला किया। वकील ने कहा, "उन्होंने मुझे पीटा और न्यायाधीश वहीं बैठे थे। कोर्ट के सभी सदस्य मौजूद थे।" इस पर सीजेआइ ने निर्देश देते हुए कहा, "मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखें और मुझे भी उसकी एक प्रति भेजें। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संज्ञान लेने दें। कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर होगी। इस तरह का 'गुंडा राज' हमें स्वीकार्य नहीं है। यह कानून के शासन की विफलता है।"

विवादों में रहा है तीस हजारी कोर्ट

Tees Hazari Court के कॉम्प्लेक्स में 7 फरवरी को हुई इस घटना में वकील ने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता ने कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर कोर्टरूम के अंदर ही उन पर हमला किया। तीस हजारी कोर्ट परिसर अतीत में भी विवादों में रहा है। सितंबर 2025 में एक विवाद के बाद कुछ वकीलों द्वारा एक व्यक्ति और उसके परिजनों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आया था। इससे पूर्व भी पुलिस-वकीलों में हिंसक विवाद और वकीलों के गुटों के बीच झड़प में हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस मामले ने फिर एक बार अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Updated on:
9 Feb 2026, 2:46 PM IST
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