
Abhijeet Dipke on CJP: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि कल (बुधवार) संगठन की बैठक होगी, जिसमें जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में संगठन के विस्तार पर चर्चा होगी और भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि फिलहाल संगठन को राजनीतिक दल में बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
ANI से बातचीत में अभिजीत दीपके ने बताया कि बैठक की शुरुआत जंतर-मंतर प्रदर्शन की समीक्षा से होगी। इसमें प्रतिभागियों से यह भी सुझाव लिए जाएंगे कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संगठन देशभर में अपनी टीम का विस्तार करने और अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर भी विचार करेगा, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सीजेपी के राजनीतिक दल बनने की अटकलों पर अभिजीत दीपके ने कहा कि फिलहाल इस तरह की कोई चर्चा नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर इस बात पर सहमति है कि वह एक सामाजिक आंदोलन के रूप में ही काम करता रहेगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की कथित उस टिप्पणी पर, जिसमें उन्होंने जेन-ज़ेड (Gen Z) से संवाद की बात कही थी, दीपके ने इसे अच्छी शुरुआत बताया। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के आंदोलन ने वरिष्ठ नेताओं को नई पीढ़ी से संवाद करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा, 'मैं कहूंगा कि यह अच्छी शुरुआत है। आखिरकार, इस देश के युवाओं ने मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी और भाजपा सांसदों जैसे लोगों को जेन-ज़ेड के बारे में बात करने के लिए मजबूर कर दिया।'
हालांकि, दीपके ने सुझाव दिया कि युवाओं से संवाद के लिए युवा और शिक्षित चेहरों को आगे लाया जाना चाहिए, क्योंकि जेन-ज़ेड के लिए वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं से जुड़ाव महसूस करना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा, 'मेरी सलाह होगी कि नए, युवा और शिक्षित चेहरों को सामने लाया जाए।' केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि संवाद से ही समस्याओं का समाधान निकलता है, दRपके ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।
उन्होंने कहा, 'बिल्कुल। समाधान केवल संवाद से ही निकलता है। हम जंतर-मंतर पर क्यों बैठे थे? बातचीत करने के लिए। जैसे ही हमारी जेपी नड्डा से बात हुई, समाधान निकल आया और इस्तीफा भी हो गया।'
इससे पहले सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता अतुल लिमये ने नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर सीजेपी के आंदोलन का केस स्टडी के रूप में अध्ययन करने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन में कई विदेशी और राजनीतिक तत्व शामिल हो गए थे और उन्होंने "लोकतांत्रिक तरीकों से लोकतंत्र को कमजोर करने" की सोच को बढ़ावा दिया।
30 जुलाई को छत्रपति संभाजीनगर में एबीवीपी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लिमये ने यह भी आरोप लगाया कि सीजेपी के मंच से हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए।
कार्यक्रम में लिमये ने कहा, 'आज के समय में सीजेपी आंदोलन का केस स्टडी होना चाहिए। अब यह बात सबके सामने आ चुकी है, लेकिन यह कई वर्षों से चल रही प्रक्रिया थी। यदि हमें इस पूरे आंदोलन को समझना है तो इसकी पूरी समय-रेखा, कार्यप्रणाली, इसके समर्थन तंत्र, अपनाई गई नई रणनीतियों और इसके पीछे की विचारधारा का अध्ययन करना होगा। अभिजीत दीपके हमारे मराठवाड़ा के ही हैं। जब उन्होंने सीजेपी की शुरुआत की तो उन्हें सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिला। वे 6 जून को भारत लौटे और 7 जून को आंदोलन शुरू कर दिया।'