
CJP Parliament March: दिल्ली में कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) के चलो संसद मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। इसके चलते राजधानी के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। इससे रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने और यात्रा की योजना पहले से बनाने की अपील की है।
कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि जनपथ, राजिव चौक और पटेल चौक मेट्रो स्टेशन के गेट बंद कर दिए गए हैं। पार्टी ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से कहा कि वे जंतर मंतर पहुंचने के लिए अपनी यात्रा पहले से तय करें। इन स्टेशनों के बंद होने का असर आम यात्रियों पर भी देखने को मिला, क्योंकि यह दिल्ली के सबसे व्यस्त मेट्रो स्टेशनों में शामिल हैं।
सुरक्षा कारणों से केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के एंट्री और एग्जिट गेट भी बंद कर दिए गए। स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुलिस और सुरक्षाकर्मी यात्रियों की आवाजाही पर नजर रखते दिखाई दिए। जंतर मंतर और संसद के आसपास पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
इसी बीच कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कहा है कि संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। पार्टी के नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई। पुलिस ने भीड़ अधिक होने से कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई, जबकि CJP ने कहा कि उनका मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक महीने से जंतर मंतर पर बैठे लोगों ने लोकतंत्र को फिर से मजबूत करने का काम किया है। दिपके ने यह भी कहा कि देशभर से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और उन्हें संसद तक जाने से कोई नहीं रोक सकता।
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट में फिर से अपील दायर की है। उन्होंने उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें वांगचुक को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग खारिज कर दी गई थी। अपील में कहा गया है कि मरीज और उसके परिवार को इलाज और अस्पताल चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।