
Abhijeet Dipke: NEET-UG 2026 और पेपर लीक के मुद्दे पर जारी CJP (Cockroach Janata Party) के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने कहा है कि छात्र किसी भी मुद्दे पर उनसे चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के बाद CJP ने बातचीत के लिए दो स्पष्ट शर्तें रख दी हैं। वहीं संगठन के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दे पर बोलने में प्रधानमंत्री को 34 दिन लग गए और अब भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाया जा रहा है।
जंतर-मंतर से संबोधित करते हुए CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रधानमंत्री को युवाओं के मुद्दे पर बोलने में 34 दिन लग गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश कर रही है, जबकि छात्रों की मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच केंद्र सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि छात्र उनसे किसी भी विषय पर बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र चाहें तो नड्डा के आवास, कार्यालय या अपनी पसंद के किसी अन्य स्थान पर मुलाकात कर सकते हैं।
सरकार के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि संगठन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन पहले सरकार को दो शर्तें स्वीकार करनी होंगी। रंका ने कहा कि पहली शर्त यह है कि बातचीत जेपी नड्डा के कार्यालय में नहीं, बल्कि जंतर-मंतर या किसी अन्य सहमति वाले स्थान पर हो। दूसरी शर्त यह है कि बातचीत केवल औपचारिकता न बने, बल्कि उसके बाद सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाए।
इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सरकार से यह पूछना चाहिए कि पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कब इस्तीफा देंगे। प्रियंका गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल पूछने की बात कही। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज, छात्रों के घायल होने, इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।