
CJP Protest Jantar Mantar: जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी है। गुरुवार और शुक्रवार की रात 12.30 बजे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म किया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने एक्टिविस्ट वांगचुक का अनशन तुड़वाया। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर एक अफवाह तेजी से फैल गई कि दिल्ली पुलिस ने तीन युवकों को निज़ामुद्दीन थाने में सिर्फ इसलिए हिरासत में ले लिया क्योंकि वे जंतर मंतर पर खाना ले जा रहे थे। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद लोगों का गुस्सा फिर से भड़क गया।
पोस्ट में लिखा था कि बिना किसी वजह के बच्चों को पकड़ा जा रहा है। यह बात देखते ही देखते वायरल हो गई। लोगों ने इसे पुलिस की मनमानी बताकर जमकर आलोचना शुरू कर दी। लेकिन जैसे ही यह पोस्ट फैली, दक्षिण पूर्वी दिल्ली के डीसीपी दफ्तर ने तुरंत सामने आकर इसका खंडन किया। डीसीपी ने साफ शब्दों में लिखा कि निजामुद्दीन थाने में बच्चों को खाना ले जाने पर हिरासत में लेने की बात पूरी तरह "झूठी और भ्रामक" है। पुलिस ने कहा कि किसी भी अधिकारी ने किसी व्यक्ति को खाना ले जाने से रोका नहीं था।
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला रोजमर्रा की चेकिंग का हिस्सा था। जिस जगह पिकेट यानी चेकपोस्ट लगी थी, वहां से गुजरने वाली हर गाड़ी की तरह इस गाड़ी को भी रोका गया। गाड़ी की तलाशी ली गई और पूछचाथ की गई। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह कोई खास कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आम तौर पर होने वाली पहचान जांच थी।
इस पूरे मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब पहचान जांच के दौरान गाड़ी का ड्राइवर वहां से चला गया, साथ में गाड़ी और सामान भी ले गया। पुलिस ने बताया कि यह ड्राइवर गाड़ी में बैठे लोगों का जाना-पहचाना व्यक्ति नहीं था। उसे तो एक दोस्त के जरिए बुलाया गया था। जब तक ड्राइवर वहां से निकला, पुलिसकर्मियों को यह भी पता नहीं था कि गाड़ी में रखा खाना प्रदर्शनकारियों के लिए ले जाया जा रहा है।
जब पुलिस ने गाड़ी में बैठे लोगों से पूछा, तब उन्होंने बताया कि यह खाना जंतर मंतर पर चल रहे धरने पर ले जाया जा रहा था। यानी पुलिस को इस बात की जानकारी उस वक्त तक नहीं थी, जब गाड़ी रोकी गई थी। यह जानकारी पूछताछ के दौरान सामने आई।
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में साफ कहा कि उनके जवान सिर्फ अपनी तय ड्यूटी निभा रहे थे। पिकेट और चेकपोस्ट पर पहचान जांचना उनका रोज़ का काम है। पुलिस ने इस वायरल दावे को "आधारहीन और बदनीयती से फैलाया गया" बताया और कहा कि इसका मकसद एक सामान्य जांच प्रक्रिया को गलत रंग देना था।