
Pappu Yadav on CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आज दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पिछले तीन वर्षों से संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के वोटिंग अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं, हालांकि यह लड़ाई अब कुछ राजनेताओं तक ही सीमित नहीं है। पप्पू यादव नेकहा कि आज पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है और भारत की नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z और Gen-Alpha देश के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए मैदान में उतर आई है।
केंद्र सरकार को 'नए अंग्रेज' और 'तानाशाह हुकूमत' करार देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ यह लड़ाई देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक जन-आंदोलन में बदल गई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने छात्र हितों के मुद्दों से लेकर वोट की चोरी और संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर होने जैसे मुद्दों पर अकेले मोर्चा संभाला था। लेकिन, अब देश के गरीब, युवा और आने वाली पीढ़ियाँ भी इस संघर्ष का हिस्सा बन गई हैं।
सांसद ने कहा कि जहां सत्ता के गलियारे पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का डर दिखाई देता था, वहीं अब इस तानाशाही शासन को देश के जागरूक युवाओं और बच्चों की आवाज से डर लग रहा है।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सत्ता का अहंकार इस हद तक बढ़ गया है कि भारतीय करेंसी पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर की जगह नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाने तक की बात हो रही थी।जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह जीवित रहते हुए बड़े पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का नामकरण अपने नाम पर कराया गया, उसी तरह की व्यक्तिगत प्रचार वाली मानसिकता हर संवैधानिक व्यवस्था पर हावी होने लगी थी।
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए पप्पू यादव ने कहा कि आज के जन-आक्रोश को देखकर उन्हें भरोसा हुआ है कि देश, संविधान और लोकतंत्र सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि देश के बच्चों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और नई पीढ़ी बिना किसी डर के आजादी से जी सकेगी। उन्होंने कहा कि कोई भी तानाशाह सरकार देश के युवाओं के अधिकार नहीं छीन सकती और न ही लोकतंत्र की बुनियादी मज़बूती को कमज़ोर कर सकती है।