
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच बनाने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में केंद्र सरकार से पहल करने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से कहा है कि दक्षिण भारत के लोगों को न्याय पाने के लिए हर बार दिल्ली का सफर करना पड़ता है। चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनने से न केवल तमिलनाडु, बल्कि दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों के लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
विजय ने अपनी चिट्ठी में यह भी बताया है कि पिछले 40 साल से तमिलनाडु यह मांग कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के साथ नए सिरे से बातचीत करे और चेन्नई में बेंच स्थापित करने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार कराया जाए।
मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि तमिलनाडु में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनाने की मांग पहली बार 1980 में उठाई गई थी। इसके बाद कई बार इस मुद्दे को अलग-अलग मंचों पर उठाया गया, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है।
उन्होंने आगे कहा कि इतने लंबे समय से मांग उठने के बावजूद दक्षिण भारत के लोगों को सुप्रीम कोर्ट में अपने मामलों की सुनवाई के लिए नई दिल्ली जाना पड़ता है।
इससे लोगों को समय और पैसे दोनों खर्च करने पड़ते हैं। खासकर उन लोगों के लिए यह परेशानी ज्यादा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बार-बार दिल्ली आने-जाने का खर्च नहीं उठा सकते।
सीएम विजय ने अपनी मांग के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 130 का भी जिक्र किया है। इस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में या किसी अन्य स्थान पर बैठ सकता है। हालांकि, इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश को राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होती है।
विजय ने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था के तहत चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित करने का रास्ता मौजूद है। इससे देश के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले लोगों को अपने ही क्षेत्र में शीर्ष अदालत तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इस बात पर भी जोर दिया कि चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनने का लाभ केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा। इससे केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोगों को भी फायदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था आम लोगों की पहुंच में होनी चाहिए। किसी व्यक्ति को केवल इसलिए लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए क्योंकि देश की सबसे बड़ी अदालत एक ही शहर में काम कर रही है।
विजय ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों और विधि आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय बेंच बनाने का विचार पहले भी कई बार सामने आ चुका है।
मुख्यमंत्री ने देश के संघीय ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था में भी देश के अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।