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पति से खर्चों के अलावा हर महीने मांगे 1.3 लाख रुपये, सुप्रीम कोर्ट में जज बोले- कल हमारी पत्नियां भी मांगेंगी तो कैसे देंगे?

सुप्रीम कोर्ट में पत्नी की ओर से पति से हर महीने 1,500 डॉलर यानी करीब 1.3 लाख रुपये अतिरिक्त पॉकेट मनी मांगने का मामला सामने आया। इस पर जजों ने मजाकिया अंदाज में क्या टिप्पणी की?
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भारत

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Mukul Kumar

•

Updated: 4 Nov 2026, 3:48 PM IST

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई हुई। इसमें महिला ने अपने पति से सारे खर्च के अलावा अलग से पॉकेट मनी देने की मांग की, जिस पर जज ने दिलचस्प टिप्पणी की।

पति की ओर से पत्नी के खर्चों के लिए पहले से रकम दिए जाने के बावजूद अतिरिक्त 1,500 डॉलर यानी करीब 1.3 लाख रुपये हर महीने देने की मांग की गई थी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर पतियों को पत्नी को पॉकेट मनी भी देनी पड़ेगी तो कल दूसरी पत्नियां भी ऐसी मांग करने लगेंगी।

कोर्ट में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील से कहा कि महिलाओं को इस तरह के शानदार सुझाव मत दीजिए। जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पतियों की सैलरी भी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। हमारी महीने की तनख्वाह सिर्फ 3 लाख रुपये है। कल हमारी भी पत्नियां इतना ज्यादा पॉकेट मनी मांगेंगी तो कहां से देंगे?

पत्नी ने की हर महीने 1500 डॉलर अतिरिक्त देने की मांग

इस मामले में पत्नी की ओर से अदालत में अतिरिक्त आर्थिक मदद की मांग रखी गई थी। पत्नी का कहना था कि पति की ओर से दूसरे खर्चों का भुगतान किए जाने के अलावा उसे हर महीने 1,500 डॉलर की अलग रकम भी दी जाए।

यानी पत्नी पहले से मिल रहे खर्चों के अतिरिक्त अपनी निजी जरूरतों के लिए अलग से पॉकेट मनी चाहती थी। इसी मांग पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया और वकील के सामने अपनी बात रखी।

'कल हमारी पत्नियां भी पॉकेट मनी मांगने लगेंगी'

सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- पति को पॉकेट मनी भी देनी होगी? यह तो बहुत खतरनाक स्थिति है। कल हमारी पत्नियां भी कहेंगी कि हमें पॉकेट मनी चाहिए।

कोर्ट ने आगे कहा कि उनकी तनख्वाह महीने में सिर्फ 3 लाख रुपये है, 15 हजार डॉलर नहीं। इसके साथ ही वकील से कहा कि यहां मौजूद महिलाओं को ऐसे शानदार विचार न दें।

गुजारा भत्ता और निजी खर्चों के बीच क्या है अंतर?

वैवाहिक विवादों में अक्सर पत्नी की ओर से गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) और दूसरे जरूरी खर्चों की मांग की जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि अलग रहने की स्थिति में पत्नी को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आर्थिक परेशानी न उठानी पड़े। हालांकि, इस मामले में पत्नी की मांग पहले से दिए जा रहे खर्चों के अलावा अतिरिक्त पॉकेट मनी की थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इसी मांग के संदर्भ में आई।

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