X पर पोस्ट करते हुए जयराम रमेश ने लिखा कि Operation Sindoor के दौरान मोदी सरकार (Modi Government) ने कई स्तरों पर भारी गलतियां की। पढ़ें उन्होंने आगे क्या क्या कहा...
भारत-पाक सैन्य संघर्ष ( India-Pakistan military conflict) के एक साल पूरे होने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने मोदी सरकार (Modi Government) पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कूटनीतिक नतीजों को लेकर आलोचना की। रमेश ने कहा कि वह सेना को सलाम करते हैं।
X पर पोस्ट करते हुए जयराम रमेश ने लिखा कि सीजफायर को लेकर पहला बयान US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने दिया था, जिन्होंने इसे US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दखल का नतीजा बताया। रमेश ने कहा कि ट्रंप ने इसके बाद सैकड़ों बार यह दावा दोहराया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी इसका खंडन नहीं किया।
रमेश ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सीजफायर का पहला ऐलान 10 मई 2025 को शाम 5:37 PM IST पर US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने किया था, जिन्होंने दावा किया था कि प्रेसिडेंट ट्रंप के दखल की वजह से यह मुमकिन हुआ। ट्रंप ने अपने इस दावे को कई बार दोहराया, जबकि उनके अच्छे दोस्त प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने एक बार भी इसका खंडन नहीं किया।
जयराम रमेश ने CDS अनिल चौहान का जिक्र करते हुए कहा कि CDS ने ऑपरेशन के दौरान टैक्टिकल गलतियों की वजह से शुरुआती नुकसान की बात मानी थी। जिसे बाद में सुधारा गया और फिर सटीक हमले किए गए। CDS ने सिंगापुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि टैक्टिकल गलतियों की वजह से भारत को शुरुआती नुकसान हुआ था, लेकिन रिव्यू और सुधार के बाद, भारत टैक्टिकल गलतियों को समझ पाया और गहरी सटीक हमलों के साथ जवाबी कार्रवाई की। रमेश ने आगे कहा कि पाकिस्तान के अंदर, यह लचीलापन और एडजस्ट करने की क्षमता दिखाता है।
रमेश ने आगे जकार्ता में भारत के डिफेंस अटैची के एक बयान का जिक्र किया। जिन्होंने ऑपरेशन के दौरान एयरक्राफ्ट के नुकसान को माना और इसके लिए पॉलिटिकल लीडरशिप द्वारा लगाई गई रुकावटों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आगे कहा कि 10 जून 2025 को, जकार्ता में एक सेमिनार में, इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास में डिफेंस अटैची ने माना कि भारत ने 7 मई 2025 को अपने पॉलिटिकल लीडरशिप द्वारा लगाई गई रुकावटों के कारण एयरक्राफ्ट खो दिया था। उन्होंने उस समय के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह की टिप्पणियों की ओर भी इशारा किया, जिसमें चीन द्वारा पाकिस्तान को इंटेलिजेंस इनपुट और सैटेलाइट-बेस्ड मदद सहित कथित ऑपरेशनल सपोर्ट के बारे में कहा गया था।
रमेश ने इसे चीन के सामने सरकार के सोचे-समझे सरेंडर से जुड़ी बड़ी चिंताओं से भी जोड़ा। उन्होंने लद्दाख में पेट्रोलिंग के अधिकारों में कथित बदलाव, बढ़ते चीनी इंपोर्ट और आसान फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) नियमों जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलगाव का सामना नहीं करना पड़ा है, जबकि भारत सरकार ने इसके लिए बहुत कोशिशें की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ व फील्ड मार्शल आसीम मुनीर का भव्य आवाभगत किया। अंत में जयराम रमेश ने 1999 के कारगिल युद्ध के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा गठित कारगिल रिव्यू कमेटी का उदाहरण दिया, जिसने घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा की थी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की भी ऐसी समीक्षा की मांग की