कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता पर फिर से तलवार लटक रही है। साल 2023 में मानहानि के मामले में 2 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सांसदीय सदस्यता रद्द कर दी गई थी, लेकिन निचली अदालत के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। पढ़ें पूरी खबर...
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ सत्ता पक्ष के नेता लगातार हमले बोल रहे हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने LoP के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। उन्होंने राहुल पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर लाइफटाइम बैन लगाने की मांग की है।
इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मोशन लाने का फैसला किया था। राहुल गांधी ने नियमों को तोड़ा और एक अनपब्लिश्ड किताब का गैर-कानूनी तरीके से जिक्र किया। उन्होंने अपने बजट भाषण में भी कई बातें कहीं - 'देश बेच दिया' और PM के लिए गलत शब्द का उपयोग किया। कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर हम उन्हें नोटिस देना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि प्राइवेट मेंबर निशिकांत दुबे एक सब्सटेंटिव मोशन लाए हैं, इसलिए अभी के लिए हम उस मोशन को हटा रहे हैं जो सरकार लाने वाली थी। कोई भी सांसद मोशन ला सकता है। सब्सटेंटिव मोशन के मंजूर होने के बाद, हम स्पीकर से बात करने के बाद तय करेंगे कि हम इसे प्रिविलेज कमेटी या एथिक्स कमेटी को भेज सकते हैं या सीधे हाउस में चर्चा के लिए ला सकते हैं। यह तय किया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता पर तलवार लटकी हो। साल 2023 में सूरत की एक अदालत ने ‘मोदी उपनाम’ से जुड़े बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। सूरत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत ने IPC के सेक्शन 504 के तहत राहुल गांधी को दोषी करार दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि राहुल गांधी ने शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान किया।
कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। कानून के मुताबिक किसी भी जन प्रतिनिधि को 2 साल व उससे अधिक की सजा सुनाए जाने पर उसकी विधायी सदस्यता रद्द कर दी जाती है। साथ ही, अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जाती है। राहुल के खिलाफ फैसला आने के बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से इस मामले में अधिसूचना भी जारी की गई थी। इसमें कहा गया था कि राहुल गांधी की अयोग्यता संबंधी आदेश 23 मार्च से प्रभावी होगा।
सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ राहुल ने हाई कोर्ट में एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। गुजरात हाई कोर्ट ने भी उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। आखिर में राहुल ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी। 7 अगस्त को उनकी सदस्यता फिर से बहाल कर दी गई।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में मोदी सरकार को एपस्टीन फाइल्स से संबंधित कुछ जानकारी सदन में अपने भाषण के दौरान दी थी। अब सत्ता पक्ष का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष ने जो जानकारी दी है, उसे सत्यापित करें, वरना उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।