राष्ट्रीय

‘दिया जलाने वाले हिंदू-मुस्लिम लड़ाई के जिम्मेदार’… कांग्रेस नेता ने अयोध्या दीपोत्सव पर दिया विवादित बयान

अयोध्या के दीपोत्सव में $26.17$ लाख से अधिक दीये जलाकर बने विश्व रिकॉर्ड पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी आलोचना की है, उन्होंने दीये जलाने वालों को हिंदू-मुस्लिम विभाजन और दलित उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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Oct 21, 2025
Congress leader Udit Raj
कांग्रेस नेता उदित राज (फोटो- आईएएनएस)

उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी ने इस बार दिवाली पर दीपोत्सव मनाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया, जहां सरयू नदी के घाटों पर 26.17 लाख से अधिक दीये जलाए गए। एक तरफ इस भव्य आयोजन ने जहां आध्यात्मिक और दृश्यात्मक वैभव का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी तरफ इसने राजनीतिक गलियारों में भी तल्खी ला दी है। कांग्रेस नेता उदित राज ने इस आयोजन की आलोचना करते हुए एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग दीये जला रहे हैं, वे ही समाज में हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा करने और दलितों के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं।

यही लोग दलित उत्पीड़न के लिए भी जिम्मेदार

मीडिया बातचीत के दौरान राज ने कहा, दीये जलाने वाले ही समाज में हिंदू-मुस्लिम विभाजन के लिए जिम्मेदार हैं। वे दलित उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं। वे केवल नफरत की बात करते हैं। वे कितने भी दीये जला लें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। भारत में अपराध के खिलाफ दलितों, गरीबी और बेरोजगारी जैसे कई अन्य रिकॉर्ड हैं। इन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

दिल्ली में बढ़े प्रदूषण स्तर पर भी जताई चिंता

उदित राज ने दीपोत्सव के साथ ही दिवाली समारोह के बाद दिल्ली में बढ़े प्रदूषण स्तर पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष केवल ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी, इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता खराब हुई। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिवाली के एक दिन बाद मंगलवार की सुबह दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में 400 तक पहुंच गया। राज ने इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

आतिशबाजी पर पैसे खर्च करने वालों से भी पूछा सवाल

राज ने कहा, इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। दिवाली के दौरान प्रदूषण अचानक क्यों बढ़ गया। उन्होंने यह कहने की कोशिश की कि पराली जलाने के कारण ऐसा हुआ, लेकिन पूरी रात आतिशबाजी चलती रही। अगर कोई इस पर सवाल उठाता है, तो उसे हिंदू विरोधी करार दिया जाता है। यह कह सकते है कि अगर हम लोगों की जिंदगी और पर्यावरण को बचाने की बात करते है तो हम परंपराओं के विरोधी कहलाते है, तो ऐसे में कौन आवाज उठाएगा। राज ने आतिशबाजी पर पैसे खर्च करने वाले साक्षर और धनी लोगों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, क्या हम इसे शिक्षित आबादी मानेंगे। नागरिक समाज की भी अपनी जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण क्या हो सकता है।

Updated on:
21 Oct 2025 03:25 pm
Published on:
21 Oct 2025 03:25 pm
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