मनमोहन सिंह और सिख धर्म को लेकर संसद में सियासी विवाद गहरा गया है। मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी पर झूठे प्रचार और सिख आस्था के अपमान का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की है।
देश की राजनीति में सिख धर्म और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर नया विवाद सामने आया है। संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मनमोहन सिंह के खिलाफ झूठा और आपत्तिजनक प्रचार करने का आरोप लगाया है, जिसे उन्होंने सिख धर्म का अपमान बताया है।
खरगे ने राज्यसभा में पीएम मोदी के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। खडरगे ने कहा कि मनमोहन सिंह न केवल देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं, बल्कि वे सिख समुदाय के सम्मानित और ईमानदार प्रतिनिधि भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह को लेकर जिस तरह की बातें कही गईं, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे सिख धर्म का अपमान है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा सिख समुदाय को सम्मान दिया है और मनमोहन सिंह को दो बार प्रधानमंत्री तथा वित्त मंत्री बनाया गया।
खरगे ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मनमोहन सिंह खिलाफ झूठ को बार-बार दोहराने की रणनीति अपनाई गई, जो गोएबल्स शैली के प्रचार जैसी है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए मनमोहन सिंह की छवि को जानबूझकर खराब किया गया। खरगे के मुताबिक मनमोहन सिंह एक मेहनती और ईमानदार नेता रहे हैं, जिनकी सादगी और कामकाज की देश और विदेश में सराहना हुई। ऐसे नेता के खिलाफ गंदा प्रचार करना राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है।
इस पूरे विवाद में राहुल गांधी और कांग्रेस नेता रवनीत बिट्टू का जिक्र भी सामने आया। पीएम मोदी ने अपने भाषण में राहुल गांधी के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुद्दों पर जवाब देने के बजाय ध्यान भटकाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार असली सवालों से बच रही है और लंबा भाषण देकर झूठे दावे दोहरा रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से सिख समुदाय और मनमोहन सिंह के सम्मान में माफी की मांग की है।