
Congress Protest: चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासे के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वहीं शुक्रवार को कांग्रेस द्वारा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चेन्नई जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी जानकारी प्रदेश अध्यक्ष माणिक्कम टैगोरने दी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से शुक्रवार को चेन्नई जिला कलेक्टर कार्यालय के पास ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने निर्देश दिया है कि देशभर में सभी राज्यों की राजधानियों में चुनाव आयोग के कार्यालयों के सामने इसी तरह के राज्यस्तरीय विरोध प्रदर्शन किए जाएं। इसी के तहत कल चेन्नई में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा और हम सभी इसमें शामिल होंगे।
ईसीआई-एसआईआर विवाद पर कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि हम लंबे समय से लगातार इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में राहुल गांधी जी और मल्लिकार्जुन खरगे ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि एसआईआर को लेकर पारदर्शिता के मामले में चुनाव आयोग निष्पक्ष भूमिका निभाने में विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग के भीतर से सामने आए खुलासों से पता चलता है कि उसके सदस्यों के बीच ही सहमति का अभाव है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। दूसरा, जब खुद चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर इतना बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए था।
रंजीत रंजन ने कहा कि हमारे राज्य सभा के 73 सांसद पहले ही ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव दे चुके हैं, जो फिलहाल लंबित है। हमारा मानना है कि अब सुप्रीम कोर्ट को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और उनके इस्तीफे की मांग करनी चाहिए।
इस मामले में बीजेपी नेता नलिन कोहली की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने एकजुट होकर एक बयान जारी किया है। इसमें कोई असहमति या अलग राय सामने नहीं आई है। प्रशासन को समझने वाला कोई भी व्यक्ति जानता है कि अलग-अलग लोगों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात अंतिम निर्णय होता है। उस निर्णय को लेकर कोई चुनौती नहीं है।
बीजेपी नेता ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्षी दलों को सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर यही लोकतांत्रिक प्रक्रिया चुनाव आयोग के भीतर भी हो रही है, तो इसे तानाशाही कैसे कहा जा सकता है? मेरा मानना है कि विपक्षी दल पूरे मामले को गलत तरीके से समझ रहे हैं।