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Caste Census 2027: जातीय जनगणना पर कांग्रेस का हमला, पूछा- 2027 की जनगणना में जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन क्यों नहीं?

जातिगत जनगणना के ऐलान के बाद अब सवाल सिर्फ ‘जाति गिनेगी या नहीं’ का नहीं, बल्कि यह है कि सामने आने वाला डेटा कितना सटीक और भरोसेमंद होगा। 2021 के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे में जिस तकनीकी व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी, उसी को लेकर 2027 की कवायद पर अब नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
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Aug 18, 2026
Congress Questions Caste Census Process
Congress Questions Caste Census Process : जातीय जनगणना पर कांग्रेस का हमला, पूछा- 2027 की जनगणना में जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन क्यों नहीं? ( ANI Photo)

Caste Census Dropdown Menu: जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार सभी समुदायों की जातिगत गणना की जाएगी। लेकिन इसी फैसले के बीच एक तकनीकी सवाल अब राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने X पर जातिगत जनगणना से जुड़े मामले में सितंबर 2021 में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए एक हलफनामा पर सवाल उठाए हैं। इस बार जातियों की पहचान और रिकॉर्डिंग आखिर किस तरीके से होगी? 2021 में केंद्र के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में जातियों के लिए एक व्यवस्थित ‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’ की जरूरत बताई गई थी। अब विपक्ष पूछ रहा है कि वही व्यवस्था 2027 की कवायद में क्यों स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही है।

भारत की जनगणना 2027 अब सिर्फ आबादी की गिनती का अभ्यास नहीं रह गई है। इसमें जातिगत आंकड़े जुटाने के केंद्र सरकार के फैसले ने इसे सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। लेकिन इसी के साथ एक ऐसा तकनीकी सवाल सामने आया है, जिसका असर आने वाले वर्षों की नीतियों तक दिखाई दे सकता है लोग अपनी जाति बताएंगे तो उसे डिजिटल सिस्टम में दर्ज किस तरह किया जाएगा?

यही वजह है कि ‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’ अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। सवाल यह है कि क्या नागरिकों को पहले से तय जातियों की सूची में से विकल्प चुनने होंगे, या उन्हें अपनी जाति का नाम खुद दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।

2021 के हलफनामे से निकला नया सवाल

सितंबर 2021 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में 2011 के जातिगत आंकड़ों से जुड़ी मुश्किलों का उल्लेख किया था। सरकार ने तब कहा था कि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए व्यवस्थित व्यवस्था नहीं होने से आंकड़ों में असंगतियां पैदा हो सकती हैं। इसी संदर्भ में एक व्यवस्थित ‘ड्रॉपडाउन’ व्यवस्था को अधिक सुसंगत डेटा तैयार करने में उपयोगी बताया गया था।

अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अप्रैल 2025 में केंद्र ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना शामिल करने का फैसला किया। सरकार के मुताबिक जाति की जानकारी जनगणना के दूसरे चरण यानी Population Enumeration में ली जाएगी।

डिजिटल जनगणना में असली चुनौती

जनगणना 2027 देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप, ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। करीब 30 लाख से अधिक कर्मचारी इस विशाल अभियान में शामिल होंगे।

लेकिन जाति के मामले में डिजिटल सुविधा अपने साथ नई चुनौती भी लाती है। एक ही जाति के अलग-अलग स्थानीय नाम, वर्तनी, उपजातियां और क्षेत्रीय पहचान सामने आ सकती हैं। यदि हर नाम अलग रिकॉर्ड बन गया, तो बाद में डेटा को एक समान श्रेणी में बदलना मुश्किल हो सकता है।

इसके उलट पहले से बंद सूची रखने पर ऐसी जातियां या स्थानीय पहचान छूटने का खतरा रहेगा, जो सूची में मौजूद नहीं होंगी। इसलिए विशेषज्ञों की बहस में मानकीकृत सूची, कोडिंग व्यवस्था और अपवाद दर्ज करने के विकल्प जैसे मॉडल महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

सरकार ने अभी अंतिम व्यवस्था नहीं बताई

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जाति से जुड़े दूसरे चरण के सवाल अभी अंतिम रूप से अधिसूचित नहीं हुए हैं। फरवरी 2026 में सरकार ने राज्यसभा में कहा था कि जाति सहित दूसरे चरण के प्रश्न निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम किए जाएंगे। मार्च 2026 में भी सरकार ने यही स्थिति स्पष्ट की।

इसलिए यह दावा करना जल्दबाजी होगी कि सरकार ने जाति के लिए ड्रॉपडाउन व्यवस्था खत्म कर दी है। हालांकि, अगस्त 2026 तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं है कि जातियों की डिजिटल कोडिंग और मानकीकरण का अंतिम ढांचा क्या होगा।

बिहार-तेलंगाना के अनुभव से सीख

बिहार का जाति आधारित सर्वे और तेलंगाना के सामाजिक-आर्थिक सर्वे ने दिखाया है कि जातियों की जानकारी जुटाना केवल फॉर्म भरने का काम नहीं है। अलग-अलग सामाजिक पहचान को एक विश्वसनीय डेटाबेस में बदलना उससे कहीं कठिन प्रक्रिया है।

यही कारण है कि जनगणना 2027 में केवल जाति पूछना पर्याप्त नहीं होगा। डेटा की एकरूपता, सत्यापन, कोडिंग और बाद की प्रोसेसिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

सरकार के मुताबिक जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा। लद्दाख और कुछ बर्फीले गैर-समकालिक क्षेत्रों में इसकी समय-सारिणी अलग रखी गई है।

अब निगाहें उस प्रश्नावली पर हैं, जो जातिगत पहचान दर्ज करने का वास्तविक तरीका सामने लाएगी। सरकार के लिए चुनौती साफ है—ऐसी व्यवस्था तैयार हो जिसमें भारत की जातीय विविधता भी पूरी तरह दर्ज हो और तैयार आंकड़े इतने साफ-सुथरे हों कि उन पर भविष्य की सामाजिक कल्याण नीतियां और विकास योजनाएं भरोसे के साथ बनाई जा सकें।

यानी 2027 में सिर्फ जाति की गिनती नहीं, बल्कि सही तरीके से गिनती ही असली परीक्षा होगी।

Updated on:
18 Aug 2026 01:28 pm
Published on:
18 Aug 2026 01:28 pm