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राष्ट्रपति का कार्यक्रम स्थल बदलने पर विवाद: एक्शन में सरकार, प.बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रपति के कार्यक्रम से पहले राज्य सरकार ने अचानक कार्यक्रम स्थल बदल दिया था, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। राष्ट्रपति और PM मोदी ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई थी।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। फाइल फोटो - ANI

पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यक्रम स्थल बदलने के मामले में सरकार एक्शन में हैं। इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंश्चिम बंगाल सरकार से आज शाम तक रिपोर्ट मांगी है। कोलकाता में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यक्रम स्थल बदलने के मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

पश्चिम बंगाल सरकार को यह रिपोर्ट आज शाम तक सौंपनी होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 मार्च को आदिवासी समुदाय के हर साल आयोदित होने वाले प्रोग्राम 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल में शामिल होने गईं थीं। राष्ट्रपति के कार्यक्रम से पहले राज्य सरकार ने अचानक कार्यक्रम स्थल बदल दिया था। इस घटना के बाद विवाद बढ़ गया। राष्ट्रपति और PM मोदी ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई थी।

क्या है विवाद?

राष्ट्रपति मुर्मू को 7 मार्च को आदिवासी समुदाय के हर साल होने वाले प्रोग्राम 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया था। यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना था। ममता बनर्जी सरकार ने सुरक्षा और अन्य कारणों का हवाला देकर कार्यक्रम स्थल बदल दिया था। कार्यक्रम स्थल बिधानगर से बदलकर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया गया था। कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि मुझे लगता है बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती है। पश्चिम बंगाल दौरे पर न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री मुझे रिसीव करने आया। मुझे नहीं पता कि ममता मुझसे नाराज हैं या नहीं। वैसे, इससे कोई फर्क नहीं पड़त है। आप सब ठीक रहें।

राष्ट्रपति ने ममता बनर्जी को बताया था छोटी बहन

सिलीगुड़ी के बिधाननगर से कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके साथ ही ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताया था। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। अगर प्रोग्राम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता। वहां काफी जगह है और बहुत से लोग आ सकते थे। लेकिन राज्य सरकार ने कार्यक्रम ऐसी जगह रखा, जहां लोगों का पहुंचना मुश्किल था। ऐसा लगता है कि आदिवासी समुदाय के लोगों को कार्यक्रम में आने से रोका गया। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ लोग इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को होने नहीं देना चाहते थे। शायद कुछ लोग नहीं चाहते कि संथाल समुदाय आगे बढ़े और मजबूत बने। मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां (बिधानगर) में मीटिंग की इजाजत क्यों नहीं दी? इस घटना पर PM मोदी ने कहा था कि ये शर्मानाक है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

राष्ट्रपति के अपमान के लिए प्रशासन जिम्मेदार

PM मोदी ने कार्यक्रम स्थल बदलने को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान बताया था। उन्होंने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। मोदी ने X पर लिखा था कि आदिवासी समुदाय से ही उठे प्रेसिडेंट ने जो दुख जाहिर किया, उसने भारत के लोगों के दिलों में गहरा दुख भर दिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं। प्रेसिडेंट के इस अपमान के लिए उनका एडमिनिस्टेशन जिम्मेदार है। आदिवासी समुदाय, सभी बहुत दुखी हैं। PM ने कहा था कि प्रेसिडेंट का पद पॉलिटिक्स से ऊपर है और इस पद की गरिमा हमेशा बनी रहनी चाहिए। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस को होश आएगा।

Updated on:
08 Mar 2026 02:54 pm
Published on:
08 Mar 2026 02:41 pm
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