
Job Search Struggle : नई दिल्ली। नौकरी जाने के बाद आमतौर पर लोग नई नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक सफलता नहीं मिलने पर इसका असर मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर सामने आया है, जहां 29 वर्षीय एक पूर्व कॉरपोरेट कर्मचारी ने नौकरी जाने के बाद चार महीने तक संघर्ष करने की अपनी कहानी शेयर की। कॉरपोरेट नौकरी नहीं मिलने पर उसने 11 डॉलर प्रति प्रति घंटे की दर से बर्तन धोने का पार्ट-टाइम काम शुरू किया है।
उसने रेडिट पर 'कॉर्पोरेट से $11/घंटे की बर्तन धोने की नौकरी तक' शीर्षक से पोस्ट लिखकर बताया कि उसे अप्रेल में कॉरपोरेट नौकरी से निकाल दिया गया था। हालांकि उसे नौ महीने का अच्छा सेवरेंस पैकेज मिला था और वह नवंबर तक बेरोजगारी भत्ता भी ले रहा है, लेकिन इसके बावजूद नौकरी की तलाश जारी रही।
29 वर्षीय युवक के मुताबिक, उसने चार महीनों के दौरान 200 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन किया और 15 से अधिक इंटरव्यू दिए, लेकिन उसे कोई कॉरपोरेट नौकरी नहीं मिली। लंबे समय तक बेरोजगार रहने का असर उसकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ा। उसने लिखा कि धीरे-धीरे उसके दिनों की पूरी दिनचर्या खत्म हो गई और उसे खुद को बेकार महसूस होने लगा। उसके मुताबिक, वह उस कॉरपोरेट नौकरी की तलाश में लगा हुआ था, जिससे वह खुद पहले ही नाखुश था, लेकिन नौकरी और उससे मिलने वाली पहचान से खुद को अलग नहीं कर पा रहा था।
युवक ने बताया कि नौकरी करते समय वह काफी मितव्ययी रहा और उसने इतना इमरजेंसी फंड तैयार कर रखा है, जिससे करीब पांच साल तक उसका खर्च चल सकता है। इसके बावजूद उसने अगले सप्ताह से पार्ट टाइम डिशवॉशिंग का काम शुरू करने का फैसला किया। उसने कहा कि वह यह काम पैसे के लिए नहीं, बल्कि खुद को उपयोगी महसूस करने और दिनचर्या वापस पाने के लिए कर रहा है। उसके मुताबिक, वह चाहता है कि रोजाना कुछ घंटे काम करने से उसका मन बिजी रहे और लगातार नौकरी को लेकर चल रही चिंता से उसे थोड़ी राहत मिले।
इस अनुभव ने उसे काम और रिटायरमेंट के बीच अपने रिश्ते पर भी सोचने को मजबूर कर दिया। उसने सवाल उठाया कि अगर वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर रिटायर हो जाए, तो क्या तब भी उसे अपने खाली समय को लेकर चिंता होगी। उसने लिखा कि तमाम शौक होने के बावजूद दिन में काफी समय बच जाता है और उसे लगातार उस समय को काम से भरने की बेचैनी महसूस होती है। युवक ने बताया कि उसके पिता पिछले 30 वर्षों से कॉरपोरेट सेक्टर में काम कर रहे हैं और करीब तीन साल बाद रिटायर होने वाले हैं। उसने आशंका जताई कि रिटायरमेंट के बाद उसके पिता भी शायद खुद को खाली और असहाय महसूस कर सकते हैं।
इस पोस्ट के बाद कई रेडिट यूजर्स ने भी अपने अनुभव शेयर किए। एक यूजर ने लिखा कि किसी सामुदायिक रसोई में स्वयंसेवा करना और बर्तन धोने का काम करना उसके लिए काफी मददगार रहा। एक अन्य यूजर ने बताया कि कॉरपोरेट नौकरी जाने के बाद उसने भी कई तरह के छोटे काम किए और उसे अच्छा लगा कि वह अकेला नहीं है। एक यूजर ने कहा कि लंबे समय तक उच्च स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए नौकरी जाने के बाद दोबारा काम की दौड़ में शामिल नहीं हो पाना मानसिक रूप से बेहद मुश्किल हो सकता है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि आठ महीने से बेरोजगार रहने के बाद उसने बेरोजगारी भत्ता खत्म होने पर डॉग वॉकिंग का काम शुरू किया।