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सुभाष चंद्रा को मिली बड़ी राहत, 22,006 करोड़ के कर्जे का हुआ 6.5 करोड़ में निपटारा

Big Relief For Subhash Chandra: उद्योगपति सुभाष चंद्रा को बड़ी राहत मिली है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 28, 2026

Subhash Chandra

सुभाष चंद्रा (Photo - ANI)

उद्योगपति सुभाष चंद्रा (Subhash Chandra) को व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में मिली बड़ी राहत मिली है। कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने चंद्रा की अपनी कंपनियों को व्यक्तिगत कर्ज गारंटी की राशि चुकाने की समाधान प्रक्रिया (पुनर्भुगतान योजना) को मंजूरी दे दी जिसके तहत उन्हें 22006.57 करोड़ रुपए स्वीकृत बकाया के बदले सिर्फ 6.5 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। इसमें 25 लाख रुपए प्रक्रिया लागत के शामिल हैं। इससे कर्जदाताओं की रिकवरी करीब 0.028% ही होगी और हेयरकट करीब 99.97% रहेगा। यानी 100 रुपए कर्ज के बदले सिर्फ 3 पैसे चुकाने होंगे।

किस आधार पर तर्कों को किया खारिज?

एनसीएलटी ने लेनदार एचडीएफसी बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस आदि के तर्कों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि क़र्ज़ गारंटर चंद्रा की संपत्ति कम होने से उन्हें इतना ही पैसा मिल सकता है। तीसरे सदस्य के रूप में फैसला सुनाते हुए एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 114 के तहत इस योजना को मंजूरी दे दी। उधर एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि वो इस फैसले को अपीलीय ट्रिब्यूनलल (एनसीएलएटी) में चुनौती देने पर विचार कर रहा है।

लेनदार कर रहे विरोध

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और एचडीएफसी बैंक समेत कई लेनदारों ने योजना पर आपत्ति जताई। योजना में एलआईसी हाउसिंग के 1322.39 करोड़ रुपए के कर्ज के बदले उसे सिर्फ 38.09 लाख रुपए देने का प्रस्ताव है।

2022 में शुरू हुई थी प्रक्रिया

मामले की शुरुआत 2022 में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की याचिका से हुई। कंपनी ने एस्सेल समूह की कंपनी को दिया क़र्ज़ नहीं चुकाने पर इसके गारंटर चंद्रा पर दिवालिया कानून की धारा 95 के तहत व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। बाद में एचडीएफसी, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, आरबीएल बैंक, एक्सिस बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान इसमें जुड़ते गए और कर्ज व ब्याज समेत दावे की यह रकम 22056.57 करोड़ की हो गई। यह मामला एनसीएलटी के विचाराधीन रहा जिस पर अब फैसला आया है।

दो सदस्यीय बेंच में मतभेद, तीसरे सदस्य ने दी मंजूरी

चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना पर एनसीएलटी की मूल दो सदस्यीय बेंच में सहमति नहीं बनी। न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज योजना के पक्ष में थे, जबकि तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने गंभीर कानूनी और प्रक्रियागत आपत्ति उठाई। मतभेद दूर करने के लिए एनसीएलटी अध्यक्ष ने न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा को तीसरा सदस्य नियुक्त किया। शर्मा ने 25 अगस्त को योजना को आईबीसी की धारा 114 के तहत मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। औपचारिक आदेश मूल पीठ सुनाएगी।

एनसीएलटी ने योजना मंजूरी के ये दिए तर्क

एनसीएलटी ने तर्क दिया कि दिवालिया कानून में व्यक्तिगत गारंटर की पुनर्भुगतान योजना के लिए दावों की न्यूनतम प्रतिशत वसूली होना अनिवार्य नहीं है। 80% क़र्ज़दार योजना को स्वीकार कर रहे हैं तो वहीँ अल्पमत कर्जदारों (एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक आदि) के तर्क मंजूर नहीं किए जा सकते। चंद्रा की वसूली योग्य व्यक्तिगत संपत्ति सीमित है। क़र्ज़दाताओं को इससे बेहतर रिकवरी मिलने की गारंटी नहीं। योजना मंजूर होने पर मुख्य क़र्ज़दार कंपनियों से भविष्य में वसूली की संभावना बनी रह सकती है।